सांई की नगरिया जाना है रे बंदे भजन
सांई की नगरिया जाना है रे बंदे भजन
सांई की नगरिया जाना है रे बंदे,
जाना है रे बंदे,
सांई कि नगरिया जाना है रे बंदे,
जाना है रे बंदे,
जग नाही अपना,
जग नाही अपना बेगाना है रे बंदे,
जाना है रे बंदे जाना है रे बंदे,
सांई की नगरिया जाना है रे बंदे,
जाना है रे बंदे,
सांई की नगरिया जाना है रे बंदे,
जाना है रे बंदे,
पत्ता टूटा डार से ले गयी पवन उड़ाय,
पत्ता टूटा डार से ले गयी पवन उड़ाय,
अब के बिछड़े ना मिलें दूर पड़ेंगे जाए,
अब के बिछड़े ना मिलें दूर पड़ेंगे जाए,
माली आवत देख कर कलियन करी पुकार,
माली आवत देख कर कलियन करी पुकार,
फूले फूले चुन लिए काल हमारी बार,
फूले फूले चुन लिए काल हमारी बार,
सांई की नगरिया जाना है रे बंदे,
जाना है रे बंदे,
सांई की नगरिया जाना है रे बंदे,
जाना है रे बंदे,
चलती चाकी देख कर दिया कबीरा रोय,
चलती चाकी देख कर दिया कबीरा रोय,
दुइ पाटन के बीच में साबुत बचा ना कोय,
सांई की नगरिया जाना है रे बंदे,
सांई की नगरिया जाना है रे बंदे,
जाना है रे बंदे,
सांई कि नगरिया जाना है रे बंदे,
कबीर ने कर्मकांडों और हठधर्मिता का आँख बंद करके पालन करने के बजाय, ईश्वर के साथ एक व्यक्तिगत संबंध के महत्व पर जोर दिया। उनका मानना था कि ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति के भीतर है और व्यक्ति ध्यान और आत्म-प्रतिबिंब के माध्यम से परमात्मा का अनुभव कर सकता है। कबीर ने समानता की अवधारणा का प्रचार किया और उनका मानना था कि जाति, पंथ या धर्म की परवाह किए बिना सभी मनुष्य समान हैं।
कबीर जयंती 2018 Sai Ki Nagariya Jana Hai Re Bande,ANURADHA PAUDWAL,Hindi English Lyrics,Full HDVideo
Kabir Bhajan: Sai Ki Nagariya Jana Hai Re Bande
Singer: Anuradha Paudwal
Music Director: Nandu Honap
Lyrics: Traditional
Album: Kabir Vaani
Music Label: T-Series
जीवन की ये दुनिया तो बस एक यात्रा है, जहां हर पल हमें याद दिलाता है कि असली ठिकाना परमात्मा के चरणों में है। पत्ता डाल से टूटकर हवा में उड़ जाता है, ठीक वैसे ही हमारा ये संसार भी क्षणभंगुर है। कबीर जी की तरह चाकी देखकर मन रोता है, जब सोचते हैं कि दो पाटों के बीच कुछ भी सलामत नहीं बचता। हमें सिखाते हैं कि बिछड़ना तो होगा ही, लेकिन अगर माली की पुकार सुन ली तो फूल बनकर मुस्कुरा सकते हैं। एक संत कहते थे, "दुनिया को अपना मत समझो, ये तो बस रास्ता है, मंजिल सांई की नगरिया में इंतजार कर रही है।"
ये भाव दिल को छू जाते हैं, जब सोचते हैं कि बेगाना सब कुछ है यहां। फूल खिलते हैं और काल उन्हें चुन लेता है, फिर भी पुकार करते रहना चाहिए। साधक को ये रास्ता दिखाता है कि रोना छोड़कर चल पड़ें उस ओर, जहां कोई बिछड़न नहीं। रोज की भागदौड़ में भी ये याद रखें, तो जीवन सुंदर लगने लगता है। आइए, सब मिलकर उस यात्रा को अपनाएं, जहां शांति हमेशा साथ रहे। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री सांई जी की।
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