उड़ जायेगा जग हंस अकेला कबीर भजन

उड़ जायेगा जग दर्शन का मेला कबीर भजन

 
उड़ जायेगा उड़ जायेगा लिरिक्स Ud Jayega Hans Akela Lyrics

उड़ जायेगा उड़ जायेगा,
उड़ जायेगा हंस अकेला,
जग दर्शन का मेला।

जैसे पात गिरे तरुवर पे,
मिलना बहुत दुहेला,
ना जाने किधर गिरेगा,
ना जानूं किधर गिरेगा,
गगन पवन का रेला,
उड़ जायेगा उड़ जायेगा,
उड़ जायेगा हंस अकेला,
जग दर्शन का मेला।
जब होवे उमर पूरी
जब छूटे गा हुकुम हुज़ूरी
यम के दूत बड़े मज़बूत
यम से पडा झमेला,
उड़ जायेगा उड़ जायेगा,
उड़ जायेगा हंस अकेला,
जग दर्शन का मेला।

दास कबीर हर के गुण गावे,
वाह हर को पारण पावे,
गुरु की करनी गुरु जायेगा,
चेले की करनी चेला,
उड़ जायेगा उड़ जायेगा,
उड़ जायेगा हंस अकेला,
जग दर्शन का मेला।
 


Ud Jayega Hans Akkela ( Avdhoota Bhajan) by Pandit Kumar GandharvUd Jaayega Ud Jaayega,

Song: Ud jayega
Singer: Kumar Gandharva
Writer: Kabir
Ud Jayega hans akela
Jag darshan ka mela

जीवन का ये मेला देखो, हंस अकेला उड़ जायेगा, जग दर्शन के बाद सब छूट जायेगा। पत्ता तरवर से गिरता है, न जाने कहाँ पहुँचेगा, गगन पवन का रेला बहा ले जायेगा। उम्र पूरी हो तो यम के दूत आ धमकते हैं, झमेला पड़ जाता है, कोई साथ न दे पायेगा। बस हरि गुण गाते रहो, गुरु की करनी से पार लग जायेगा, चेले का भाग्य चमक उठेगा।

सोचो ना, कितने लोग भीड़ में खो जाते हैं, लेकिन अंत में अकेले ही जाना है। कबीर की तरह नाम जपते चलो तो डर न लगेगा, हंस उड़ान भरेगा स्वर्ग की ओर। ये बात मन को जगाती है, हर पल कीमती लगने लगता है। बस प्रेम हरि का पकड़ लो, तो मेला खत्म होने पर भी आनंद बाकी रहेगा, दिल कहेगा यही तो सच्ची जीत है।

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