होली के बहाने आया वो मेरे पास रंग गया भजन
होली के बहाने आया वो मेरे पास रंग गया भजन
होली के बहाने आया वो मेरे पास,
रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
अरे, रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
श्याम का रंग मुझ पर ऐसा चढ़ा है,
जहां भी देखूं, बस वही खड़ा है।
उसकी प्यारी बातें सताएं दिन और रात,
रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
अरे, रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
कुछ तो बताओ सखी, कहां वो मिलेगा,
उससे मिले बिना दिल ना लगेगा।
सखी, तुम ही जाकर कह दो, मेरे दिल की सारी बात,
रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
अरे, रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
मथुरा में ढूंढूं या ढूंढूं वृंदावन में,
गोकुल में ढूंढूं या ढूंढूं नंदगांव में।
कहां मिलेगा मुझको, कोई तो बता दो राज,
रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
अरे, रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
होली के बहाने आया वो मेरे पास,
रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
अरे, रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
अरे, रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
श्याम का रंग मुझ पर ऐसा चढ़ा है,
जहां भी देखूं, बस वही खड़ा है।
उसकी प्यारी बातें सताएं दिन और रात,
रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
अरे, रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
कुछ तो बताओ सखी, कहां वो मिलेगा,
उससे मिले बिना दिल ना लगेगा।
सखी, तुम ही जाकर कह दो, मेरे दिल की सारी बात,
रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
अरे, रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
मथुरा में ढूंढूं या ढूंढूं वृंदावन में,
गोकुल में ढूंढूं या ढूंढूं नंदगांव में।
कहां मिलेगा मुझको, कोई तो बता दो राज,
रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
अरे, रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
होली के बहाने आया वो मेरे पास,
रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
अरे, रंग गया अपने रंग में, वो मुझको सखी आज।
होली के बहाने आया वो मेरे पास ।। श्री राधा कृष्ण होली भजन ।।priyanjaykeshyambhajan holi2025 holi
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Title: Batao Kahan Milega Shyam
Singer: Sohini Mishra
Music Director: Sohini Mishra
Edit & Gfx : Prem Graphics PG
Music Label: Music Nova
Singer: Sohini Mishra
Music Director: Sohini Mishra
Edit & Gfx : Prem Graphics PG
Music Label: Music Nova
होली का वो रंग जब चढ़ता है, तो सारा तन-मन एक अलग ही रंग में रंग जाता है—श्याम का रंग, जो न धुलता है, न उतरता है। जैसे होली के बहाने वो खुद आया हो पास, हाथ में अबीर-गुलाल लिए, और एक झटके में सब कुछ अपना कर लिया। अब जहां देखो, बस वही दिखता है—उसकी मुस्कान, उसकी बातें, उसकी आँखों की चमक। दिन-रात मन उसी में डूबा रहता है, सांसों में उसी की महक घुली रहती है। दिल कहता है कि अब ये रंग कभी नहीं छूटेगा, क्योंकि ये रंग प्रेम का है, भक्ति का है, जो अंदर तक उतर आया है।
फिर सखी से पूछने की बेचैनी होती है—कहाँ मिलेगा वो? मथुरा की गलियों में, वृंदावन की कुटियों में, गोकुल की चौपालों पर या नंदगाँव की राहों में? दिल बेकरार है, मिलने की आस में तरसता है। सखी को ही कह दो मेरी बात, क्योंकि वो समझती है ये व्यथा, ये प्यास। होली ने जो रंग बिखेरा, वो अब जीवन भर का हो गया—श्याम ने रंग दिया तो अब बस उसी के रंग में जीना है, उसी के रंग में मरना है। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री श्याम जी की।
फिर सखी से पूछने की बेचैनी होती है—कहाँ मिलेगा वो? मथुरा की गलियों में, वृंदावन की कुटियों में, गोकुल की चौपालों पर या नंदगाँव की राहों में? दिल बेकरार है, मिलने की आस में तरसता है। सखी को ही कह दो मेरी बात, क्योंकि वो समझती है ये व्यथा, ये प्यास। होली ने जो रंग बिखेरा, वो अब जीवन भर का हो गया—श्याम ने रंग दिया तो अब बस उसी के रंग में जीना है, उसी के रंग में मरना है। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री श्याम जी की।
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Author - Saroj Jangir
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