साडा चिड़ियाँ दा चंबा वे बाबल असां सोंग

साडा चिड़ियाँ दा चंबा वे बाबल असां उड़ जाणा सोंग

 
साडा चिड़ियाँ दा चंबा वे बाबल असां उड़ जाणा लिरिक्स हिंदी Sadda Chidiya Da Chamba E Babal Asa Ud Jana Lyrics

साडा चिड़ियाँ दा चंबा वे
बाबल असां उड़ जाणा
साडी लम्मी उडारी वे
बाबल केहड़े देस जाणा


तेरे महिलां दे विच विच वे
बाबल चरखा कौन कत्ते?
मेरियां कत्तन पोतरियाँ
धिए घर जा अपणे

तेरे महिलां दे विच विच वे
बाबल गुडियां कौण खेडे
मेरियां खेडण पोतरियाँ
धिए घर जा अपणे

मेरा छुट्या कसीदा वे
बाबल दस कौन कडे?
मेरियां कडन पोतरियाँ
धिए घर जा अपणे

तेरे बागां दे विच विच वे
बाबल डोला नहीं लंघदा
इक टहनी पुट देवाँ
धिए घर जा अपणे

तेरियां भिडीयाँ गलियाँ'च वे
बाबल डोला नहीं लंघदा
इक इट पुटा देवाँ
धिए घर जा अपणे


Saada Chidiyaan Da Chamba Ve
Baabal Asaan Ud Jaana
Saadee Lammee Udaaree Ve
Baabal Kehade Des Jaana

पंजाबी लोक गीत "साडा चिड़ियाँ दा चंबा वे" एक बेटी के मन की व्यथा और अपने मायके के प्रति उसकी गहरी भावनाओं को व्यक्त करता है, जो बिदाई के समय अपने बाबुल से विदाई की बात कहती है। वह कहती है कि वह चिड़ियों का झुंड है, जो अब उड़कर अनजान देश की ओर जा रहा है। वह बाबुल से पूछती है कि उसके महलों में अब चरखा कौन कातेगा, गुड़िया कौन खेलेगा, और उसका अधूरा कसीदा (कढ़ाई) कौन पूरा करेगा। बाबुल जवाब देता है कि उसकी पोतियाँ ये सब करेंगी, और उसे अपने ससुराल जाने को कहता है। बेटी फिर कहती है कि बाबुल के बागों और गलियों में उसका डोला (पालकी) नहीं निकल पा रहा, जिसके जवाब में बाबुल कहता है कि वह टहनी या ईंट हटा देगा, पर बेटी को अपने नए घर जाना होगा। यह गीत बेटी के मायके छोड़ने की पीड़ा, बाबुल के प्रति प्रेम और ससुराल की नई शुरुआत की मार्मिक कहानी बयां करता है, जो पंजाबी संस्कृति में बिदाई की भावनाओं को गहराई से उजागर करता है।
 
यह लोकगीत विवाह की संदर्भित विदाई की भावना को दर्शाता है, जहाँ पुत्री को अपने पिता के घर से विदा होकर ससुराल जाना पड़ता है। इसे चिड़िया की तरह प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो अपने पिंजरे (पिता के घर) से उड़कर नए घर (ससुराल) की ओर जाती है। यह उड़ान लंबी, कठिन और भावुक होती है क्योंकि वह अपने परिवार को छोड़ कर एक अनजान जगह जा रही होती है। गीत में पिता को "बाबल" कहा गया है, जिसकी चिंता और पीड़ा बेटी की जिंदगी से जुड़ी है।

गीत का मूल भाव यह है कि लड़की के विदा होने से परिवार में एक खालीपन और दर्द उत्पन्न होता है, लेकिन साथ ही यह नए जीवन की शुरुआत भी है। पिता की चिंता उस प्यार और सुरक्षा की परछाई है, जो वह अपनी बेटी को नए जीवन में दे पाता है। बेटी के लिए यह एक यात्रा होती है, जिसमें वह अपने पुराने घर की यादों और नए घर के सपनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है।

यह गीत भारतीय संस्कृति में विवाह और स्त्री जीवन की संवेदनशीलता, परिवार के प्रति लगाव और सामाजिक परिवर्तन की मार्मिक छवि प्रस्तुत करता है। लड़की की विदाई को सबसे सूक्ष्म और भावुक स्थिति के रूप में दर्शाता है, जो सभी को गहरे भाव से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
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Song Name : Sada Chiryan Da Chamba
Artist : Mohammad Tufail Niazi
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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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