मनमोहन कृष्ण मुरार नटखट नन्द दुलार भजन
मनमोहन कृष्ण मुरार नटखट नन्द दुलार भजन
मनमोहन कृष्ण मुरार,
मनमोहन कृष्ण मुरार,
अरे हो नटखट नन्द दुलार,
क्यों हमसे रूठ गए,
सांवरे, क्यों हमसे रूठ गए,
तेरी लीला है अपरम पार,
तेरी लीला है अपरम पार,
अरे ओ करुणा के भण्डार,
क्यों हमसे रूठ गए,
सांवरे, क्यों हमसे रूठ गए,
सुन्दर छवि तेरी मन में बसाई,
सुन्दर छवि तेरी मन में बसाई,
कैसे सही कान्हा तेरी जुदाई,
कैसे सही कान्हा तेरी जुदाई,
बहे अँखियों से अश्कों की धार,
बहे अँखियों से अश्कों की धार,
सुनो हो जग के पालन हार,
क्यों हमसे रूठ गए,
सांवरे, क्यों हमसे रूठ गए,
आके मधुर सी मुरलिया सुना दो,
आके मधुर सी मुरलिया सुना दो,
अँखियों से मस्ती का रस बरसा दो,
अँखियों से मस्ती का रस बरसा दो,
लगी भक्तों की दर पे कतार,
लगी भक्तों की दर पे कतार,
करो अब करुणा की बौछार,
क्यों हमसे रूठ गए,
सांवरे, क्यों हमसे रूठ गए,
मोर मुकुट गले बैजंती माला,
मोर मुकुट गले बैजंती माला,
रूप कन्हैया तेरा जग से निराला,
रूप कन्हैया तेरा जग से निराला,
आवो राधा को लेके इक बार,
आवो राधा को लेके इक बार,
ये केवल अरज करो स्वीकार,
क्यों हमसे रूठ गए,
सांवरे, क्यों हमसे रूठ गए,
मनमोहन कृष्ण मुरार,
मनमोहन कृष्ण मुरार,
अरे हो नटखट नन्द दुलार,
क्यों हमसे रूठ गए,
सांवरे, क्यों हमसे रूठ गए,
तेरी लीला है अपरम पार,
तेरी लीला है अपरम पार,
अरे ओ करुणा के भण्डार,
क्यों हमसे रूठ गए,
सांवरे, क्यों हमसे रूठ गए,
Man Mohan Krishna Murar - कृष्ण जी को मनाने का अद्भुत तरीका है ये भजन - RANJEET RAJA - Hit Bhajan
Song - Man Mohan Krishna Murar
Singer - Ranjeet Raja
Music - Ranjeet Raja
Lyrics - Kewal Vinayak
Label - Shyam Bhajan Sangrah
Singer - Ranjeet Raja
Music - Ranjeet Raja
Lyrics - Kewal Vinayak
Label - Shyam Bhajan Sangrah
नटखट नन्दकुमार मनमोहन कृष्ण मुरार का रूप तो दिल को लूट लेता है, फिर भी रूठने की लीला अपार करुणा के भंडार को छुपा लेती है। सुंदर छवि मन में बसी हो तो जुदाई कैसे सही जाए, आँसुओं की धार बहती ही रहती है, मस्ती भरी नजरों से मुरली की धुन सुनाने को जी चाहता है। भक्तों की कतार दर पर लगी हो तो करुणा की बौछार हो ही जाती है। इश्वर का आशीर्वाद हर पुकार पर बरसता रहता है।
मोर मुकुट, बैजंती माला सजाए निराला रूप जग से अलग, राधा को लेके एक बार आ जाएँ तो अर्जी स्वीकार हो जाए। साधक को विरह में भी प्रेम का रंग चढ़ा देते हैं, जैसे रूठना भी प्यार का ही एक खेल हो। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कृष्ण जी की।
मोर मुकुट, बैजंती माला सजाए निराला रूप जग से अलग, राधा को लेके एक बार आ जाएँ तो अर्जी स्वीकार हो जाए। साधक को विरह में भी प्रेम का रंग चढ़ा देते हैं, जैसे रूठना भी प्यार का ही एक खेल हो। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कृष्ण जी की।
वृंदावन के ओ सरकार तुमसे चलता भजन
जब जब हुआ मैं परेशान तूने ही रखा
बादशाह हो गए देखते देखते क्या से क्या भजन
