ओ मुरली वाले मुरली को बजा दे कृष्ण भजन
जिसको सुन कर तन मन महके,
ऐसी तान सुना दे,
ओ मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
ओ मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
याद में तेरी धड़के ये दिल,
याद में तेरी धड़के ये दिल,
मन की प्यास बुजा दे,
ओ मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
मेरे मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
बन जाऊँ मैं जोगी तेरा प्यार तुम्हारा पा जाऊँ,
प्यारे बन जाऊँ मैं जोगी तेरा प्यार तुम्हारा पा जाऊँ,
श्याम तुम्हारे चरण की रज को निज मस्तक पे लगा जाऊँ,
श्याम तुम्हारे चरण की रज को निज मस्तक पे लगा जाऊँ,
श्याम रंग में रंगी चुनरिया आकर मुझे उढ़ा दे ,
ओ मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
मेरे मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
प्यारे जग के सारे बंधन तोड़ू लाज शरम बिसरा दूँ,
जग के सारे बंधन तोड़ू लाज शरम बिसरा दूँ,
प्रीत लगा ले तुमसे मोहन, प्रीतम तुम्हे बना लूँ,
प्रीत लगा ले तुमसे मोहन, प्रीतम तुम्हे बना लूँ,
प्रेम प्रीत के गहने लेकर, आकर मुझे सजा दे,
ओ मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
मेरे मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
प्यारे तेरे नाम की धुन में पागल राधा छम छम नाचे,
तेरे नाम की धुन में पागल राधा छम छम नाचे,
मीरा गली गली गुण गाये, पीकर को विष नाचे,
जान की बाजी लगी हुयी है, आकर जान बजा ले,
ओ मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
मेरे मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
जिसको सुन कर तन मन महके,
जिसको सुन कर तन मन महके,
ऐसी तान सुना दे,
ओ मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
ओ मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
याद में तेरी धड़के ये दिल,
याद में तेरी धड़के ये दिल,
मन की प्यास बुजा दे,
ओ मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
मेरे मुरली वाले, मुरली को बजा दे,
मुरली वाले तू मुरली सुना दे नई सुनानी ते सानू फड़ा दे।#newkrishnabhajan
मुरली की एक तान सुनकर तन-मन में ऐसी महक फैल जाती है जैसे कोई पुरानी खुशबू फिर से जीवित हो गई हो। याद में दिल धड़कता रहता है, और मन की प्यास बुझाने के लिए बस वही धुन चाहिए जो श्याम की मुरली से निकलती है। राधा जैसी पागल होकर छम-छम नाचने लगती है, मीरा गली-गली गुण गाती फिरती है, विष पीकर भी नाचती है क्योंकि वह धुन में जान बस जाती है। जग के सारे बंधन टूट जाते हैं, लाज-शरम भूल जाती है, और प्रेम के गहने पहनकर बस उसी के रंग में रंग जाना चाहती है। चुनरिया श्याम रंग की ओढ़कर, चरण की रज माथे पर लगाकर, जोगिन बनकर भी प्यार पा लेना चाहती है।
जब मुरली बजती है तो सारी दुनिया भूल जाती है, बस एक ही नाम गूँजता रहता है – मोहन, प्रीतम, श्याम। जान की बाजी लगी है, इसलिए आकर वह तान बजा दो जो दिल को चैन दे, प्यास बुझा दे, और जीवन को प्रेम से भर दे। साधक का मन यही पुकारता रहता है कि ओ मुरली वाले, बस एक बार फिर से बजा दो, ताकि हर सांस में वही महक घुल जाए। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कृष्ण जी की।
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