श्यामा आन बसों वृन्दावन में तृप्ति शाक्य भजन
श्यामा आन बसों वृन्दावन में तृप्ति शाक्य भजन
श्यामा आन बसों वृन्दावन में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा आन बसों वृन्दावन में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा रस्ते में बाग बना जाना,
फूल बीनूंगी तेरी माला के लिए,
तेरी बाट निहारूं कुंजन में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा रस्ते में कुआ खुदवा जाना,
मैं तो नीर भरुंगी तेरे लिए,
मैं तुझे नहालाउंगी मल मल के,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा मुरली मधुर सुना जाना,
मोहे आके दरश दिखा जाना,
तेरी सूरत बसी है अंखियन में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा वृन्दावन में आ जाना,
आकर के रास रचा जाना,
सूनी गोकुल की गलियन में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा माखन चुराने आ जाना,
आकर के दही बिखरा जाना,
बस आप रहो मेरे मन में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
रविवार सुबह स्पेशल | श्याम आ बसों वृंदावन में | श्री कृष्ण भजन | श्री राम भजन Shyama Aan Baso Vrindavan Mein By Tripti Shaqyaमेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा आन बसों वृन्दावन में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा रस्ते में बाग बना जाना,
फूल बीनूंगी तेरी माला के लिए,
तेरी बाट निहारूं कुंजन में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा रस्ते में कुआ खुदवा जाना,
मैं तो नीर भरुंगी तेरे लिए,
मैं तुझे नहालाउंगी मल मल के,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा मुरली मधुर सुना जाना,
मोहे आके दरश दिखा जाना,
तेरी सूरत बसी है अंखियन में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा वृन्दावन में आ जाना,
आकर के रास रचा जाना,
सूनी गोकुल की गलियन में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा माखन चुराने आ जाना,
आकर के दही बिखरा जाना,
बस आप रहो मेरे मन में,
मेरी उमर बीत गयी गोकुल में,
श्यामा आन बसों वृन्दावन में,
मेरी उमर बीत गई गोकुल में,
श्यामा आन बसो वृन्दावन में।
श्यामा रस्ते में बाग़ लगा जाना
फूल बिनुंगी तेरी माला के लिए
तेरी बाँट निहारूं कुंजन में
मेरी उमर बीत गई गोकुल में
श्यामा आन बसो वृन्दावन में।
श्यामा रस्ते में कुंवा खुदवा जाना
मैं तो नीर भरूंगी तेरे लिए
मैं तुझे नहलाऊंगी मल मल के
मेरी उमर बीत गई गोकुल में
श्यामा आन बसो वृन्दावन में।
श्याम मुरली मधुर सुना जाना
मोहे आके दरश दिखा जाना,
तेरी सूरत बसी है अँखियाँ में
मेरी उमर बीत गई गोकुल में
श्यामा आन बसो वृन्दावन में।
मेरी उमर बीत गई गोकुल में,
श्यामा आन बसो वृन्दावन में।
श्यामा रस्ते में बाग़ लगा जाना
फूल बिनुंगी तेरी माला के लिए
तेरी बाँट निहारूं कुंजन में
मेरी उमर बीत गई गोकुल में
श्यामा आन बसो वृन्दावन में।
श्यामा रस्ते में कुंवा खुदवा जाना
मैं तो नीर भरूंगी तेरे लिए
मैं तुझे नहलाऊंगी मल मल के
मेरी उमर बीत गई गोकुल में
श्यामा आन बसो वृन्दावन में।
श्याम मुरली मधुर सुना जाना
मोहे आके दरश दिखा जाना,
तेरी सूरत बसी है अँखियाँ में
मेरी उमर बीत गई गोकुल में
श्यामा आन बसो वृन्दावन में।
Shyam Aan Baso Vrindavan Mein | श्यामा आन बसों वृन्दावन में | Shyam Bhajan by Sukh Sagar ( Full HD)
Song: Shyama Aan Baso Vrindavan Mein
Singer: Sukh Sagar
DOP - Music: Rahul Rana
Video: Vaishnavi Creations - 89101 - 20840
Singer: Sukh Sagar
DOP - Music: Rahul Rana
Video: Vaishnavi Creations - 89101 - 20840
श्यामा वृन्दावन बसाओ आके, गोकुल सूना पड़ा उम्र भर व्याकुल रह गया। रास्ते बाग गाड़ दो फूल बीनूँ माला तेरी, कुंजन में बाट जोहूँ हर पल प्रतीक्षा में। कुआँ खुदवा दो मैं नीर भरूँगी नहलाऊँगी प्रेम से मल मल के। साधकों को इश्वर का आशीर्वाद पुकार से मिलता है, जैसे कोई अपना लौट आए घर की देहरी पर।
मुरली मधुर बजा दो दर्शन दे दो मोहे, रास रचा दो सूनी गलियों में। माखन चुरा दही बिखेर दो बस मन में रह जाना। गोकुल की यादें उम्र भर सताती रहीं, आके सब हरा-भरा कर दो। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री श्यामा जी! जय श्री कृष्ण जी! जिंदगी बीतती जा रही है और मन अभी भी वृंदावन की गलियों में खोया रहता है। श्यामा बस वृंदावन में आकर रह जाएं तो सारी उम्र गोकुल में गुजर जाने का गम मिट जाए। रास्ते में बाग लगा दें तो फूल चुन-चुनकर उनकी माला गूंथ सकूं। कुंजों में उनकी बाट देखते हुए दिन कट जाएं।
रास्ते में कुआं खुदवा दें तो मैं नीर भरकर उन्हें नहलाऊं, मल-मलकर सेवा कर सकूं। मुरली की मधुर धुन सुनाएं तो अखियों में बसी उनकी सूरत और भी गहरी उतर जाए। सूनी गलियों में आकर रास रचाएं तो गोकुल फिर से महक उठे।
माखन चुराने आएं, दही बिखेर दें, बस उनके आने से ही मन भर जाए। उम्र चाहे जितनी भी बीत जाए, अगर वे मन में बस जाएं तो हर पल वृंदावन सा लगने लगता है।
जब भी जीवन सूना या अधूरा लगे, बस श्यामा को वृंदावन बुला लो। वे आ जाते हैं और सारा मन महकाने लगता है।
मुरली मधुर बजा दो दर्शन दे दो मोहे, रास रचा दो सूनी गलियों में। माखन चुरा दही बिखेर दो बस मन में रह जाना। गोकुल की यादें उम्र भर सताती रहीं, आके सब हरा-भरा कर दो। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री श्यामा जी! जय श्री कृष्ण जी! जिंदगी बीतती जा रही है और मन अभी भी वृंदावन की गलियों में खोया रहता है। श्यामा बस वृंदावन में आकर रह जाएं तो सारी उम्र गोकुल में गुजर जाने का गम मिट जाए। रास्ते में बाग लगा दें तो फूल चुन-चुनकर उनकी माला गूंथ सकूं। कुंजों में उनकी बाट देखते हुए दिन कट जाएं।
रास्ते में कुआं खुदवा दें तो मैं नीर भरकर उन्हें नहलाऊं, मल-मलकर सेवा कर सकूं। मुरली की मधुर धुन सुनाएं तो अखियों में बसी उनकी सूरत और भी गहरी उतर जाए। सूनी गलियों में आकर रास रचाएं तो गोकुल फिर से महक उठे।
माखन चुराने आएं, दही बिखेर दें, बस उनके आने से ही मन भर जाए। उम्र चाहे जितनी भी बीत जाए, अगर वे मन में बस जाएं तो हर पल वृंदावन सा लगने लगता है।
जब भी जीवन सूना या अधूरा लगे, बस श्यामा को वृंदावन बुला लो। वे आ जाते हैं और सारा मन महकाने लगता है।
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Author - Saroj Jangir
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