हे गिरधारी कृष्ण मुरारी नैया कर दो भजन

हे गिरधारी कृष्ण मुरारी नैया कर दो पार भजन

 
हे गिरधारी कृष्ण मुरारी नैया कर दो पार लिरिक्स Hey Girdhari Krishna Murari Naiya Lyrics

हे गिरधारी कृष्ण मुरारी 
नैय्या कर दयो पार खिवैया बण जावो
बण जावो बाबा बण जावो
आज खिवैया बण जावो
संकटहारी अर्ज गुजारी,
लीलै रा असवार, खिवैया बण जावो

कईया रुस्या बैठ्या हो बोलो जी क्छू बोलो जी
रीस करो क्यूँ टाबर पै आँख्या तो प्रभु खोलो जी
झुर झुर रोवै मनडै रो पंछी,
हिवड़ै रा आधार, खिवैया

थे रुस्यां ना पार पडै, था सूं प्रीत पुराणी है
मुलक्या सरसी सांवरिया निठुराई क्यू ठाणी है
दीनानाथ अनाथ पुकारै, दुखिया थारै द्वार

कुँज बिहारी बनवारी, मनड़ो म्हारो काचो है
रूप तिहारो कानुड़ा नैणा मांही राच्यों है,
फोड़ा घालो क्यू नही बोलो
बोलो लखदातार, खिवैया

श्याम बहादुर सेवकियो चाकर है सिरदारा को
जन्म जन्म को साथीड़ों केवटियो मझधारा को,
कृष्ण कन्हैया डगमग नैया दीज्यो पार उतार, खिवैया



मेरी भी नैया पार कर दो |Pukar | Tushar Mishra | Naiya Kar Do Paar | Latest Khatu Shyam Bhajan 2020
 
he giradhaaree krshn muraaree naiyya kar dayo paar khivaiya ban jaavo
Ban Jaavo Baaba Ban Jaavo
Aaj Khivaiya Ban Jaavo
Sankatahaari Arj Gujaari,
Lilai Ra Asavaar, Khivaiya Ban Jaavo

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Song: Hey Girdhari Krishan Murari
Singer Tushar Mishra 8290136889
Music: Binny Narang (9991980610)
Video: Shalini Sharma (7015960610)
Lyrics Shyamleen Shivcharan Ji Bhimrajka

दुनिया की नैय्या डगमगाती है, भँवरों में फँसी है, और मन का खिवैया कहीं दूर बैठा है। लेकिन जब गिरधारी कृष्ण मुरारी को पुकारा जाता है, तो वो खुद खिवैया बन जाते हैं। संकटहारी बनकर नैय्या को पार करा देते हैं, क्योंकि उनकी लीला का असवार कोई और नहीं, वो खुद हैं। मन का पंछी झुर-झुर रोता है, हिवड़े का आधार डगमगाता है, पर वो रूठे बैठे हैं तो बोलो जी, कुछ बोलो जी। रिस क्यों करते हो टाबर पर, आँखें खोल दो प्रभु, ये दीन की पुकार है, अनाथ की गुहार है।

कुंज बिहारी, बनवारी, मन तो काँचा है, तेरे रूप ने आँखों में रच बस गया है। कानूड़ा रूप इतना प्यारा कि देखकर दिल ठहर जाता है, फिर भी बोल नहीं पड़ते। फोड़ा क्यों नहीं डालते, बोलो लखदातार। श्याम बहादुर के सेवक, सिरदारा के चाकर, जन्म-जन्म का साथी, मझधार का केवट – सब यही कहते हैं कि डगमग नैय्या को पार उतार दो। प्रीत पुरानी है, निठुराई क्यों ठानी है, मुलक्या सरसी सांवरिया। दुखिया तेरे द्वार पर खड़ा है, बस एक बार हाथ बढ़ा दो, नैय्या किनारे लग जाएगी, मन का बोझ उतर जाएगा।
ये पुकार इतनी गहरी है कि सुनते ही लगता है, वो आ रहे हैं, खिवैया बनकर, लीला रचकर, सब कुछ संभालने। बस थोड़ा सा भरोसा रखो, थोड़ा सा नाम जपो, और देखो कैसे गिरधारी खुद नैय्या थाम लेते हैं।
 
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