मल्लवली नगरी में धाम बनीयो हद भारी भजन
मल्लवली नगरी में धाम बनीयो हद भारी भजन
मल्लवली नगरी में,
धाम बनियो हद भारी,
आईजी रो भारी,
देवी जगदंबा रो रूप,
मां परचा भारी,
आवे लाखों नर ने नार,
दर्शन री बलिहारी,
हे मैसूर मंडियां में,
ज्योत जागती थोरी,
ओ आई मां थोरी,
थोरो शिखरबंध मोटो धाम,
निमे नर नारी,
मैया दुखहरणी मम मात,
आई मां म्हारी।।
ओ मैया चैत्र वदी पाचम रविवार,
मेलो भरियो भारी,
आया नर नारी,
2082 संवत ने प्रतिष्ठा होवे भारी,
थारी जागे जगमग ज्योत,
आरतियां होवे भारी,
ओ बीरा गौरी रा नंद गणेश जी,
बडेर में बिराजे,
भगतों रा कारज साजे,
राधा कृष्ण संग आई माताजी बिराजे,
मैया करुणा रो भंडार,
ए किरपा करावे,
हे मल्लवली नगरी में,
धाम बनियो हद भारी,
आईजी रो भारी,
देवी जगदंबा रो रूप,
मां परचा भारी।।
ओ मैया माता शीतला री,
महिमा जग में निराली,
है कृपा भारी,
संग बिराजे भेरुजी मोटा देव,
माता रा अगवानी,
पूरे भगतों रे मन री आस,
लीला घणी न्यारी,
ओ आवे रूनीचा रा नाथ,
लीले असवारी,
भालो भलके भारी,
दुखिया ने सुखिया करावे,
अलख अवतारी,
बाबो करदे भवसूं पार,
सुने भगतां री,
हे मैसूर मंडियां में,
ज्योत जागती थोरी,
ओ आई मां थोरी,
थोरो शिखरबंध मोटो धाम,
निमे नर नारी।।
ओ मैया बैल सवारी कर,
भगतों रे द्वारे आवे,
दर्शन धन पावे,
आवे माधव सिंह जी दिवान,
आशीष दिरावे,
बाजे ढोल नगाड़ा जोर,
भगत बधावे,
ओ मैया अखंड ज्योति रा,
जो नर दर्शन पावे,
निहाल हो जावे,
बीरा सिवरे जकोरे,
सकल कष्ट मिट जावे,
मैया सीरवियों री राय,
ए किरपा करावे,
हे मल्लवली नगरी में,
धाम बनियो हद भारी,
आईजी रो भारी,
देवी जगदंबा रो रूप,
मां परचा भारी।।
ओ मैया दो दिवसीय रो,
यज्ञ भगत करावे,
घणा हर्षावे,
गावे सखियां मंगलाचार,
सौरभ सुख पावे,
थारी होवे जय जयकार,
गगन गूंजावे,
ओ मैया अमर ध्वजा,
देवल पे सदा लहरावे,
सबोरे मन भावे,
चढ़े घी रत मिठाई,
नारेलो रा भोग लगावे,
एतो सीरवी समाज,
आईजी रा हरजस गावे,
हे मैसूर मंडियां में,
ज्योत जागती थोरी,
ओ आई मां थोरी,
थोरो शिखरबंध मोटो धाम,
निमे नर नारी।।
ओ मैया समस्त कार्यकरणी,
हिलमिल ने आवे,
आईजी ने ध्यावे,
मैया माही बीज रा,
सारी रात जमला जगावे,
मैया करदो बेड़ा पार,
आनंद हो जावे,
ओ मैया मनीष सीरवी,
भजन भाव सु बनावे,
रायपुर सूं आवे,
ओ भवानी कोलू वालो,
राजपुरोहित गावे,
मैया रमेश सीरवी,
निव निव धोक लगावे,
हे मल्लवली नगरी में,
धाम बनियो हद भारी,
आईजी रो भारी,
देवी जगदंबा रो रूप,
मां परचा भारी।।
मल्लवली नगरी में,
धाम बनियो हद भारी,
आईजी रो भारी,
देवी जगदंबा रो रूप,
मां परचा भारी,
आवे लाखों नर ने नार,
दर्शन री बलिहारी,
हे मैसूर मंडियां में,
ज्योत जागती थोरी,
ओ आई मां थोरी,
थोरो शिखरबंध मोटो धाम,
निमे नर नारी,
मैया दुखहरणी मम मात,
आई मां म्हारी।।
धाम बनियो हद भारी,
आईजी रो भारी,
देवी जगदंबा रो रूप,
मां परचा भारी,
आवे लाखों नर ने नार,
दर्शन री बलिहारी,
हे मैसूर मंडियां में,
ज्योत जागती थोरी,
ओ आई मां थोरी,
थोरो शिखरबंध मोटो धाम,
निमे नर नारी,
मैया दुखहरणी मम मात,
आई मां म्हारी।।
ओ मैया चैत्र वदी पाचम रविवार,
मेलो भरियो भारी,
आया नर नारी,
2082 संवत ने प्रतिष्ठा होवे भारी,
थारी जागे जगमग ज्योत,
आरतियां होवे भारी,
ओ बीरा गौरी रा नंद गणेश जी,
बडेर में बिराजे,
भगतों रा कारज साजे,
राधा कृष्ण संग आई माताजी बिराजे,
मैया करुणा रो भंडार,
ए किरपा करावे,
हे मल्लवली नगरी में,
धाम बनियो हद भारी,
आईजी रो भारी,
देवी जगदंबा रो रूप,
मां परचा भारी।।
ओ मैया माता शीतला री,
महिमा जग में निराली,
है कृपा भारी,
संग बिराजे भेरुजी मोटा देव,
माता रा अगवानी,
पूरे भगतों रे मन री आस,
लीला घणी न्यारी,
ओ आवे रूनीचा रा नाथ,
लीले असवारी,
भालो भलके भारी,
दुखिया ने सुखिया करावे,
अलख अवतारी,
बाबो करदे भवसूं पार,
सुने भगतां री,
हे मैसूर मंडियां में,
ज्योत जागती थोरी,
ओ आई मां थोरी,
थोरो शिखरबंध मोटो धाम,
निमे नर नारी।।
ओ मैया बैल सवारी कर,
भगतों रे द्वारे आवे,
दर्शन धन पावे,
आवे माधव सिंह जी दिवान,
आशीष दिरावे,
बाजे ढोल नगाड़ा जोर,
भगत बधावे,
ओ मैया अखंड ज्योति रा,
जो नर दर्शन पावे,
निहाल हो जावे,
बीरा सिवरे जकोरे,
सकल कष्ट मिट जावे,
मैया सीरवियों री राय,
ए किरपा करावे,
हे मल्लवली नगरी में,
धाम बनियो हद भारी,
आईजी रो भारी,
देवी जगदंबा रो रूप,
मां परचा भारी।।
ओ मैया दो दिवसीय रो,
यज्ञ भगत करावे,
घणा हर्षावे,
गावे सखियां मंगलाचार,
सौरभ सुख पावे,
थारी होवे जय जयकार,
गगन गूंजावे,
ओ मैया अमर ध्वजा,
देवल पे सदा लहरावे,
सबोरे मन भावे,
चढ़े घी रत मिठाई,
नारेलो रा भोग लगावे,
एतो सीरवी समाज,
आईजी रा हरजस गावे,
हे मैसूर मंडियां में,
ज्योत जागती थोरी,
ओ आई मां थोरी,
थोरो शिखरबंध मोटो धाम,
निमे नर नारी।।
ओ मैया समस्त कार्यकरणी,
हिलमिल ने आवे,
आईजी ने ध्यावे,
मैया माही बीज रा,
सारी रात जमला जगावे,
मैया करदो बेड़ा पार,
आनंद हो जावे,
ओ मैया मनीष सीरवी,
भजन भाव सु बनावे,
रायपुर सूं आवे,
ओ भवानी कोलू वालो,
राजपुरोहित गावे,
मैया रमेश सीरवी,
निव निव धोक लगावे,
हे मल्लवली नगरी में,
धाम बनियो हद भारी,
आईजी रो भारी,
देवी जगदंबा रो रूप,
मां परचा भारी।।
मल्लवली नगरी में,
धाम बनियो हद भारी,
आईजी रो भारी,
देवी जगदंबा रो रूप,
मां परचा भारी,
आवे लाखों नर ने नार,
दर्शन री बलिहारी,
हे मैसूर मंडियां में,
ज्योत जागती थोरी,
ओ आई मां थोरी,
थोरो शिखरबंध मोटो धाम,
निमे नर नारी,
मैया दुखहरणी मम मात,
आई मां म्हारी।।
वैजनाथ महादेव फलवदी नगरी धाम न्यू भजन सिंगर भवानी सिंह कोलू @devofficial4693
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मल्लवली नगरी में वो धाम ऐसा बसा है कि लाखों नर-नार दर्शन को आते हैं, और हर आने वाले की आँखें भर आती हैं। आईजी माँ का वो रूप, जगदम्बा का वो परचा, इतना भारी और इतना मीठा कि देखते ही मन झुक जाता है। मैसूर मंडियां में ज्योत जागती रहती है, शिखरबंध मोटा धाम हर तरफ़ रोशनी बिखेरता है, और नर-नारी दिन-रात माँ के चरणों में सिर नवाते रहते हैं। चैत्र वदी पाँचम के रविवार को मेला लगता है, 2082 संवत् में प्रतिष्ठा हुई, तब से ज्योत जगमगाती है, आरतियाँ गूँजती हैं, और भक्तों का कारज सँवरता जाता है। बीरा गौरी के नंद गणेश जी बड़ेर में विराजे हैं, राधाकृष्ण संग माँ बिराजती हैं, करुणा का भंडार खोलकर सबकी आस पूरी करती हैं।
शीतला माँ की महिमा निराली है, भेरूजी मोटे देव साथ में अगवानी करते हैं, रूनीचा के नाथ लीला असवारी लेकर आते हैं, दुखिया को सुखिया बना देते हैं। बैल सवारी कर माँ भक्तों के द्वारे पहुँचती हैं, माधव सिंह जी दिवान आशीष बरसाते हैं, ढोल-नगाड़े बजते हैं, भक्त बधाई देते हैं। दो दिवसीय यज्ञ में सखियाँ मंगलाचार गाती हैं, घिरत-मिठाई चढ़ती है, नारियल का भोग लगता है, अमर ध्वजा देवल पर लहराती रहती है। समस्त कार्यकरणी हिल-मिलकर माँ को ध्यावती है, माही बीज की रात जागरण होता है, और माँ बेड़ा पार करा देती है। मनीष सीरवी भजन भाव से गाते हैं, रायपुर से आते हैं, भवानी कोलू वाले राजपुरोहित गाते हैं, रमेश सीरवी निव-निव धोक लगाते हैं। ये धाम इतना भारी है कि जो भी आता है, वो दर्शन की बलिहारी चढ़ा जाता है, और माँ दुखहरणी बनकर सबके दुख हर लेती है। आई माँ म्हारी, ओ आई माँ थोरी, तेरी कृपा से जीवन खिल उठता है।
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