सोहनी जम्मी बोड़ दी छांवे पंजाबी फोक सोंग

सोहनी जम्मी बोड़ दी छांवे पंजाबी फोक सोंग

सोहनी जम्मी बोड़ दी छांवे लिरिक्स Sohni Mitti Gunndi Lyrics
सोहनी जम्मी बोड़ दी छांवे
घर घुम्मेयारां दे
सोहनी लम्मी सुरू दा बूटा
घर घुम्मेयारां दे
सोहनी मिट्टी नू गुन्नदी थप्पदी
घर घुम्मेयारां दे
सोहनी महिवाल महिवाल करदी
विच दरियावां दे
सोहनी कच्चे घड़े ते तरदी
विच दरियावां दे
मिट्टी खुरदी भुरदी जांदी
विच दरियावां दे
पार लंघा दे वे, घड़ेया
मिन्नतां तेरियां करदी
उत्तों रात हेनरी वे
नाले कोई नईयो मेरा दरदी
मैं कच्चा तरण ना जाणा नी
मैं पार पत्तन दे जाणा नी
ओथे यार दा मेरे ठिकाणा नी
पार लगा दे वे, घड़ेया
मिन्नतां तेरियां करदी
सोहनी डुब गयी, मर गयी, तर गयी
विच दरियावां दे
सोहनी मर गयी ते गुत ओदी तरदी
विच दरियावां दे



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मिट्टी का कच्चा घड़ा उसकी प्रेम–यात्रा का सहारा बनता है। सोहनी रात के अँधेरे में, खतरनाक दरिया को पार कर अपने प्रेमी महिवाल से मिलने जाती है और घड़े से विनती करती है कि आज उसे पार लगा दे, क्योंकि उस पार उसके यार का ठिकाना है और उसके सिवा दुनिया में कोई अपना नहीं।

गीत में कच्चे घड़े का गलना, मिट्टी का झरना और तेज़ धारा प्रेम की नाज़ुकता और जीवन के खतरे को दर्शाते हैं। सोहनी जानती है कि उसे तैरना नहीं आता, फिर भी प्रेम में डूबी वह जोखिम उठाती है। अंत में उसका बलिदान सामने आता है—सोहनी दरिया में डूब जाती है, मर जाती है, लेकिन उसका केश (जुट्टी/चोटी) बहता हुआ दिखाई देता है, जो उसके अमर प्रेम का प्रतीक बन जाता है। यह लोकगीत सिखाता है कि सच्चा प्रेम शरीर से नहीं मरता; वह त्याग, साहस और स्मृति के रूप में सदैव जीवित रहता है।

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