चलो मन वृंदावन की ओर प्रेम का रस जहाँ भजन

चलो मन वृंदावन की ओर प्रेम का रस जहाँ भजन

चलो मन वृन्दावन की ओर,
प्रेम का रस जहाँ छलके है,
कृष्णा नाम से भोर,
चलो मन वृंदावन की ओर....

भक्ति की रीत जहाँ पल पल है,
प्रेम प्रीत की डोर,
राधे राधे जपते जपते,
दिख जाए चितचोर,
चलो मन वृंदावन की ओर....

उषा की लाली के संग जहाँ,
कृष्णा कथा रस बरसे,
राधा रास बिहारी के मंदिर,
जाते ही मनवा हरषे,
ब्रिज की माटी चंदन जैसी,
मान हो जावे विभोर,
चलो मन वृंदावन की ओर.....

वन उपवन में कृष्णा की छाया,
शीतल मन हो जाए,
मन भी हो जाए अति पावन,
कृष्णा कृपा जो पाए,
नारायण अब शरण तुम्हारे,
कृपा करो इस ओर,
चलो मन वृंदावन की ओर.....



Chalo Man Vrindavan Ki Aur || चलो मन वृन्दावन की और || By - Govind Ji Bhargav

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According to Bhagavata Purana, Krishna was born by divine "mental transmission" from the mind of Vasudeva into the womb of Devaki. Based on scriptural details and astrological calculations the date of Krishna's birth, known asJanmashtami, is 19 July 3228 BCE and departed on 3102 BCE. Krishna belonged to theVrishni clan of Yadavas from Mathura, and was the eighth son born to the princessDevaki, and her husband Vasudeva.
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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