जुआं हस्तिनापुर में खेल रहे कुंती के पांचों बेटे

जुआं हस्तिनापुर में खेल रहे कुंती के पांचों बेटे


जुआं हस्तिनापुर में खेल रहे
कुंती के पांचों बेटे।

पहली चाल चली शकुनि ने,
वो तो बाग-बगीचा हारे।
कुंती के पांचों बेटे,
जुआं हस्तिनापुर में।

दूसरी चाल चली शकुनि ने,
वो तो ताल-तलैया हारे।
कुंती के पांचों बेटे,
जुआं हस्तिनापुर में।

तीसरी चाल चली शकुनि ने,
वो तो कुआं जगतिया हारे।
कुंती के पांचों बेटे,
जुआं हस्तिनापुर में।

चौथी चाल चली शकुनि ने,
वो तो महल अटारी हारे।
कुंती के पांचों बेटे,
जुआं हस्तिनापुर में।

पांचवी चाल चली शकुनि ने,
वो तो नार द्रोपदी हारे।
कुंती के पांचों बेटे,
जुआं हस्तिनापुर में।

छठवीं चाल चली कान्हा ने,
द्रोपदी का चीर बढ़ाया।
कुंती के पांचों बेटे,
जुआं हस्तिनापुर में।


जुआ हस्तिनापुर मैं खेल रहे कुंती के पांचों बेटा Krishna bhajan kirtan

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हस्तिनापुर में जुए का खेल चल रहा है, जिसमें कुंती के पाँचों बेटे, पांडव, शकुनि की चालों में फँसते चले जाते हैं। शकुनि की पहली चाल में वे बाग-बगीचे हार जाते हैं। दूसरी चाल में ताल-तलैया उनके हाथ से निकल जाते हैं। तीसरी चाल में कुएँ और जगतियाँ हार जाते हैं। चौथी चाल में महल और अटारियाँ भी चली जाती हैं। पाँचवीं चाल में सबसे बड़ा नुकसान होता है, जब द्रौपदी को दाँव पर हार जाते हैं। लेकिन छठवीं चाल में कान्हा (श्रीकृष्ण) प्रकट होते हैं और द्रौपदी की लाज बचाते हैं, उनके चीर को बढ़ाकर उनकी रक्षा करते हैं। यह भजन पांडवों के जुए में सब कुछ खो देने की कथा और अंत में श्रीकृष्ण की कृपा से द्रौपदी की रक्षा का चित्रण करता है, जो उनकी भक्ति और शक्ति को दर्शाता है।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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