है करामात क्या उनके चरणों की रज में भजन

है करामात क्या उनके चरणों की रज में भजन

 
है करामात क्या उनके चरणों की रज में Hai Karamaat Kya Unke Bhajan Maithili Thakur Rishav Thakur Ayachi Thakur

भरी उनकी आँखों में है, कितनी करुणा
जाकर सुदामा भिखारी से पूछो।
है करामात क्या उनके चरणों की रज में,
जाकर के गौतम की नारी से पूछों।

कृपा कितनी करते हैं शरणागतों पे,
कृपा कितनी करते हैं शरणागतों पे,
बता सकते हैं यदि, बता सकते हैं यदि,
मिलेंगे विभीषण,
पतितों को पावन, वो कैसे बनाते,
जटायू सरिस, मनसा हारी से पूछो
है करामात क्या उनके चरणों की रज में,
जाकर के गौतम की नारी से पूछों।

प्रभु कैसे सुनते हैं, दुखियों की आहें
तुम्हें ज्ञात हो राजा, बलि की कहानी,
निराधार का कौन, आधार है जग में,
ये प्रश्न द्रुपद दुलारी से पूछो,
है करामात क्या उनके चरणों की रज में,
जाकर के गौतम की नारी से पूछों।

क्षमा शीलता उनमें, कितनी भरी है
बताएँगे भृगुजी, वो सब जानते हैं
हृदय उनका भावों का, है कितना भूखा,
विदुर सबरी से, बारी बारी से पूछो
है करामात क्या उनके चरणों की रज में,
जाकर के गौतम की नारी से पूछों। 

Bhari unki aankhon me hai kitni karuna Bhajan Maithili Thakur, Rishav Thakur, Ayachi Thakur
Bhari Unaki Aankhon Mein Hai, Kitanee Karuna
Jaakar Sudaama Bhikhari Se Puchho.
Hai Karaamaat Kya Unake Charanon Kee Raj Mein,
Jaakar Ke Gautam Ki Naari Se Puchhon. 
 
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राम जी की आँखों में जो करुणा भरी रहती है, वह हर उस इंसान को छू जाती है जो कभी दुख में डूबा हो। सुदामा जैसे गरीब मित्र को जब वे द्वार पर खड़े देखते हैं, तो बिना किसी हिचकिचाहट के गले लगा लेते हैं, घर में बिठाते हैं और पुरानी दोस्ती को ताज़ा कर देते हैं। उसकी झोपड़ी में जो प्रेम से भोजन परोसा जाता है, उसे वे बड़े चाव से ग्रहण करते हैं। ऐसे में गरीबी का बोझ हल्का हो जाता है और दिल में बस खुशी भर जाती है। गौतम ऋषि की पत्नी अहल्या को जब पत्थर बनने का श्राप लगा था, तो राम जी के चरणों की धूल ने उसे छूते ही मुक्ति दे दी। वह पाप से मुक्त होकर फिर से जीवित हो उठी। विभीषण जैसे रावण के भाई ने जब शरण मांगी, तो राम ने बिना किसी शर्त के उन्हें अपना लिया और लंका का राज तिलक कर दिया। जटायु ने राम जी की सेवा में प्राण तक दे दिए, तो उन्होंने उसके अंतिम संस्कार तक का ध्यान रखा।

प्रभु की यह दया हर दुखी को सुनाई देती है। राजा बलि ने जब सब कुछ दान कर दिया, तो राम ने उसे पाताल लोक का राजा बनाकर सम्मान दिया। द्रौपदी की पुकार पर चीर बढ़ाकर उसकी लज्जा बचाई। भृगु जी ने पैर से छाती पर लात मारी, फिर भी राम ने क्षमा कर दी। विदुर और शबरी जैसे साधारण लोगों को उन्होंने इतना प्रेम दिया कि उनका हृदय भावों से भर गया। ऐसे उदाहरण देखकर लगता है कि राम जी का हृदय हमेशा दुखियों के लिए खुला रहता है। शरण में आने वाले को कभी निराश नहीं करते। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राम जी की। 

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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