विनती सुनो मेरी कृष्ण मुरारी कृष्णा भजन
विनती सुनो मेरी कृष्ण मुरारी कृष्णा भजन
विनती सुनो मेरी कृष्ण मुरारी
आया हूँ मैं शरण तिहारी
ऐसा हूँ मैं कैसा हूँ मैं
दीन सुदामा जैसा हूँ मैं
मेरे भी तंदुल तुम स्वीकारो
निर्बल निर्धन के हितकारी
विनती सुनो मेरी
मैं जानता हूँ तुम हो मेरे
तुमको सिमरूँ मैं साँझ सवेरे
यह कहते हैं आँसू मेरे
हर लो संकट संकटहारी
विनती सुनो मेरी
सूरदास का मन हर लिया
मीरा बाई को दर्शन दिया
श्यामल शाह का वेश बना के
नरसी भक्त की हुंडी तारी
विनती सुनो मेरी
यूँ न सताओ आ भी जाओ
मुरली की इक तान सुनाओ
तरस रहे हैं नैन हमारे
अब दिखला दो सूरत प्यारी
विनती सुनो मेरी
श्री कृष्ण गोबिंद हरे मुरारी
हे नाथ नारायण वासुदेव
जय राधे राधे श्याम मिला दे
आया हूँ मैं शरण तिहारी
ऐसा हूँ मैं कैसा हूँ मैं
दीन सुदामा जैसा हूँ मैं
मेरे भी तंदुल तुम स्वीकारो
निर्बल निर्धन के हितकारी
विनती सुनो मेरी
मैं जानता हूँ तुम हो मेरे
तुमको सिमरूँ मैं साँझ सवेरे
यह कहते हैं आँसू मेरे
हर लो संकट संकटहारी
विनती सुनो मेरी
सूरदास का मन हर लिया
मीरा बाई को दर्शन दिया
श्यामल शाह का वेश बना के
नरसी भक्त की हुंडी तारी
विनती सुनो मेरी
यूँ न सताओ आ भी जाओ
मुरली की इक तान सुनाओ
तरस रहे हैं नैन हमारे
अब दिखला दो सूरत प्यारी
विनती सुनो मेरी
श्री कृष्ण गोबिंद हरे मुरारी
हे नाथ नारायण वासुदेव
जय राधे राधे श्याम मिला दे
विनती सुनो मेरी कृष्ण मुरारी, आया हु मैं शरण तिहारी.... // Arun bhaiya ji hoshiarpur //
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कृष्ण मुरारी के चरणों में शरण माँगता मन विनती करता है। सुदामा-सा दीन, निर्बल और निर्धन, बस अपने तंदुल लिए उनके सामने खड़ा है, स्वीकार करने की प्रार्थना करता है। वह जानता है कि कृष्ण उसके हैं, साँझ-सवेरे जिनका स्मरण करता है। आँसुओं भरी आँखें संकटहारी से संकट दूर करने की गुहार लगाती हैं।
सूरदास का मन हर लिया, मीरा को दर्शन दिया, श्यामल शाह का वेश बनाया, और नरसी भक्त की हुंडी तारी—ऐसे ही भक्तों का उद्धार करने वाले मुरारी से यह मन भी अपनी पुकार लगाता है। मुरली की एक तान सुनाने की, प्यारी सूरत दिखाने की आस लिए नैन तरस रहे हैं। श्री कृष्ण, गोविंद, हरे मुरारी, नाथ, नारायण, वासुदेव—हर नाम में उनकी महिमा है। राधे-राधे का जाप करते हुए, बस एक ही विनती है कि श्याम का मिलन करा दो, क्योंकि उनके बिना मन अधूरा है।
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श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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सूरदास का मन हर लिया, मीरा को दर्शन दिया, श्यामल शाह का वेश बनाया, और नरसी भक्त की हुंडी तारी—ऐसे ही भक्तों का उद्धार करने वाले मुरारी से यह मन भी अपनी पुकार लगाता है। मुरली की एक तान सुनाने की, प्यारी सूरत दिखाने की आस लिए नैन तरस रहे हैं। श्री कृष्ण, गोविंद, हरे मुरारी, नाथ, नारायण, वासुदेव—हर नाम में उनकी महिमा है। राधे-राधे का जाप करते हुए, बस एक ही विनती है कि श्याम का मिलन करा दो, क्योंकि उनके बिना मन अधूरा है।
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Author - Saroj Jangir
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