अखियां लड गई शाम दे नाल
अखियां लड गई शाम दे नाल
अखियां लड़ गईं शाम के साथ
सखी री मैं तो हो गई मालो माल
अखियां लड़ गईं शाम के साथ
शाम तो मेरा वृंदावन जाता
वृंदावन जाता वहाँ गऊएँ चराता
तेरी गइयाँ करे कमाल
अखियां लड़ गईं
शाम सलोना मेरा मथुरा में जाता
मथुरा में जाता वहाँ मक्खन चुराता
तेरी मटकी करे कमाल
अखियां लड़ गईं
शाम सलोना मेरा निधिवन जाता
निधिवन जाता वहाँ रास रचाता
ओ तेरी सखियाँ करे कमाल
अखियां लड़ गईं
शाम सलोना मेरा यमुना पे जाता
यमुना पे जाता वहाँ बंसी बजाता
ओ तेरी बंसी करे कमाल
अखियां लड़ गईं
श्याम सलोना मेरी गली से न निकलता
मिल जाए कहीं मेरे तरफ भी न देखता
ओ मेरा जीना हुआ मुहाल
अखियां लड़ गईं
सखी री मैं तो हो गई मालो माल
अखियां लड़ गईं शाम के साथ
शाम तो मेरा वृंदावन जाता
वृंदावन जाता वहाँ गऊएँ चराता
तेरी गइयाँ करे कमाल
अखियां लड़ गईं
शाम सलोना मेरा मथुरा में जाता
मथुरा में जाता वहाँ मक्खन चुराता
तेरी मटकी करे कमाल
अखियां लड़ गईं
शाम सलोना मेरा निधिवन जाता
निधिवन जाता वहाँ रास रचाता
ओ तेरी सखियाँ करे कमाल
अखियां लड़ गईं
शाम सलोना मेरा यमुना पे जाता
यमुना पे जाता वहाँ बंसी बजाता
ओ तेरी बंसी करे कमाल
अखियां लड़ गईं
श्याम सलोना मेरी गली से न निकलता
मिल जाए कहीं मेरे तरफ भी न देखता
ओ मेरा जीना हुआ मुहाल
अखियां लड़ गईं
Akhiyan lad gayi sham di naal, विद लिरिक्स, अखियां लड गई शाम दे नाल, भजन
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आँखें श्याम के साथ लड़ गईं, और मन मालो-माल हो गया। सखी, यह दिल अब श्याम के रंग में डूब चुका है। श्याम वृंदावन जाता है, जहाँ गायों को चराता है, और उसकी गइयाँ कमाल करती हैं। मथुरा में मक्खन चुराता है, उसकी मटकी हर किसी को मोह लेती है।
निधिवन में रास रचाता है, जहाँ सखियाँ उसकी मस्ती में खो जाती हैं। यमुना किनारे बंसी की तान छेड़ता है, और उसकी बंसी का जादू सारे ब्रज को बाँध लेता है। पर जब वह मेरी गली से निकलता है, तो मेरी ओर देखता तक नहीं। उसकी एक झलक के बिना जीना मुहाल हो गया है। श्याम का सलोना रूप, उसकी हर अदा, मन को बेकरार कर देती है, और अब तो बस उसकी राह में आँखें बिछी हैं।
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सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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निधिवन में रास रचाता है, जहाँ सखियाँ उसकी मस्ती में खो जाती हैं। यमुना किनारे बंसी की तान छेड़ता है, और उसकी बंसी का जादू सारे ब्रज को बाँध लेता है। पर जब वह मेरी गली से निकलता है, तो मेरी ओर देखता तक नहीं। उसकी एक झलक के बिना जीना मुहाल हो गया है। श्याम का सलोना रूप, उसकी हर अदा, मन को बेकरार कर देती है, और अब तो बस उसकी राह में आँखें बिछी हैं।
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श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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