चलो चुलो चलो धाम बरसाने
चलो चुलो चलो धाम बरसाने
चलो चलो चलो धाम बरसाने,
बरसाने रैहंदे राधा-रसिक दीवाने।।
संतां-भगतां रसिक जनां दी, बरसाना राजधानी,
ऊँचे महल अटारी रैहंदी, श्री राधा ब्रज रानी।
अजर सखियाँ सेवा विच रैहंदियाँ, कर सेवा सुख माने।। चलो...
बरसाने दी मोर-कुटी विच, पैला पावन मोर,
गहबर-वन दे फुल-कलियाँ ते, नचन घूमन मोर।
गान बुलबुलां, गीत रसीले, राधा-नाम तराने।। चलो...
दिव्य दर्शन राधा रानी दा, नाम बड़ा सुखकारी,
चढ़ी रहे दिन-रात खुमारी, नाम विच मस्ती भारी।
राधा-नाम दी मस्ती विच, मस्त रहन मस्ताने।। चलो...
मधुप हरि दी बंसी करदी, श्री राधा रसपान,
कर राधा-रसपान बंसी, करे राधा गुणगान।
ऐस लई नंदलाल कन्हैया, जावे रोज बरसाने।। चलो...
बरसाने रैहंदे राधा-रसिक दीवाने।।
संतां-भगतां रसिक जनां दी, बरसाना राजधानी,
ऊँचे महल अटारी रैहंदी, श्री राधा ब्रज रानी।
अजर सखियाँ सेवा विच रैहंदियाँ, कर सेवा सुख माने।। चलो...
बरसाने दी मोर-कुटी विच, पैला पावन मोर,
गहबर-वन दे फुल-कलियाँ ते, नचन घूमन मोर।
गान बुलबुलां, गीत रसीले, राधा-नाम तराने।। चलो...
दिव्य दर्शन राधा रानी दा, नाम बड़ा सुखकारी,
चढ़ी रहे दिन-रात खुमारी, नाम विच मस्ती भारी।
राधा-नाम दी मस्ती विच, मस्त रहन मस्ताने।। चलो...
मधुप हरि दी बंसी करदी, श्री राधा रसपान,
कर राधा-रसपान बंसी, करे राधा गुणगान।
ऐस लई नंदलाल कन्हैया, जावे रोज बरसाने।। चलो...
chalo dham barsane | radha rani bhajan | mamta
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बरसाने का धाम बुलाता है, जहाँ राधा के रसिक दीवाने बसते हैं। वहाँ संत, भक्त, और रसिकों की राजधानी है, जहाँ ऊँचे महल और अटारी में श्री राधा ब्रजरानी विराजती हैं। सखियाँ उनकी सेवा में तल्लीन रहती हैं, और सेवा में ही सुख पाती हैं। चलो, उस धाम की ओर बढ़ें।
बरसाने की मोर कुटिया में पावन मोर नाचते हैं, गहबर वन में फूलों की कलियों पर मोर झूमते हैं। बुलबुलें रसीले गीत गाती हैं, और हर तरफ राधा के नाम के तराने गूँजते हैं। वहाँ का हर दृश्य मन को मोह लेता है।
राधा रानी का दर्शन दिव्य है, उनका नाम सुख देने वाला और मस्ती से भरा है। दिन-रात उनके नाम की खुमारी चढ़ी रहती है, और भक्त उस मस्ती में मस्त रहते हैं। मधुप कहता है, हरि की बंसी राधा के रस में डूबकर उनका गुणगान करती है। नंदलाल कन्हैया भी रोज बरसाने राधा के रसपान को जाते हैं। चलो, हम भी उस रस के सागर में डूबने बरसाने चलें।
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बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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बरसाने का धाम बुलाता है, जहाँ राधा के रसिक दीवाने बसते हैं। वहाँ संत, भक्त, और रसिकों की राजधानी है, जहाँ ऊँचे महल और अटारी में श्री राधा ब्रजरानी विराजती हैं। सखियाँ उनकी सेवा में तल्लीन रहती हैं, और सेवा में ही सुख पाती हैं। चलो, उस धाम की ओर बढ़ें।
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राधा रानी का दर्शन दिव्य है, उनका नाम सुख देने वाला और मस्ती से भरा है। दिन-रात उनके नाम की खुमारी चढ़ी रहती है, और भक्त उस मस्ती में मस्त रहते हैं। मधुप कहता है, हरि की बंसी राधा के रस में डूबकर उनका गुणगान करती है। नंदलाल कन्हैया भी रोज बरसाने राधा के रसपान को जाते हैं। चलो, हम भी उस रस के सागर में डूबने बरसाने चलें।
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Author - Saroj Jangir
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