क्या तन माँजता रे एक दिन माटी भजन
क्या तन माँजता रे एक दिन माटी में मिल जाना भजन
अज्ञान के वश में जीवात्मा तन को ही आधार मानती है, लेकिन सुआ (तोता) तो अंदर बैठा है उससे कोई सम्बोधन नहीं है और हाड मॉस के पुतले से सभी कार्य व्यवहार चल रहा है। कबीर साहेब ने इस पर व्यंग्य कर जीवात्मा को समझाया है की तुम इस काया को साफ़ सुथरा करने में ही लगे हो। अंदर की तरफ़ झाकों।
यह तन माटी (पंचभूत) तत्वों से बना है और माटी में ही मिल जाना है। जितना इसे चमकाने में व्यस्त हो उतना ध्यान अगर अंदर लगाया जाय तो समस्त बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती है। यह जीवन सदा के लिए नहीं है, इसलिए साहेब की बंदगी को स्वीकार करो और अपना ध्यान हृदय की शुद्धता पर लगाओ, यही मुक्ति का आधार है। सांसारिक बंधन केवल छल हैं ये साथ नहीं देने वाले हैं। श्री नाथ जी महाराज, आदेश आदेश।
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना,
पवन चले उड़ जाना रे पगले (हो),
पवन चले उड़ जाना रे पगले,
समय चूक पछताना,
समय चूक पछताना,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
चार जना मिल घडी बनाई,
चला काठ की डोली,
चारों तरफ से आग लगा दी,
चारों तरफ से आग़ लगा दी,
फूंक दई जस होरी,
फूंक दई जस होरी,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
हाड़ जले जैसे बन की लकड़ियां,
केश जले रे जैसे घासा,
कंचन जैसी काया जल गई,
कंचन जैसी काया जल गई,
कोई ना आए पासा,
कोई ना आए पासा,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
तीन दिना तेरी तिरिया रोवे,
तेरह दीना तेरा भाई,
जनम जनम तेरी माता रोवे,
जनम जनम तेरी माता रोवे,
करके आस पराई,
करके आस पराई,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
माटी ओढ़ना माटी बिछोना,
माटी का सिरहाना रे,
कहे कबीरा सुन ले रे बन्दे,
कहे कबीरा सुन ले रे बन्दे,
ये जग आना जाना,
ये जग आना जाना,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
एक दिन माटी में मिल जाना,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना,
पवन चले उड़ जाना रे पगले (हो),
पवन चले उड़ जाना रे पगले,
समय चूक पछताना,
समय चूक पछताना,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
चार जना मिल घडी बनाई,
चला काठ की डोली,
चारों तरफ से आग लगा दी,
चारों तरफ से आग़ लगा दी,
फूंक दई जस होरी,
फूंक दई जस होरी,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
हाड़ जले जैसे बन की लकड़ियां,
केश जले रे जैसे घासा,
कंचन जैसी काया जल गई,
कंचन जैसी काया जल गई,
कोई ना आए पासा,
कोई ना आए पासा,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
तीन दिना तेरी तिरिया रोवे,
तेरह दीना तेरा भाई,
जनम जनम तेरी माता रोवे,
जनम जनम तेरी माता रोवे,
करके आस पराई,
करके आस पराई,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
माटी ओढ़ना माटी बिछोना,
माटी का सिरहाना रे,
कहे कबीरा सुन ले रे बन्दे,
कहे कबीरा सुन ले रे बन्दे,
ये जग आना जाना,
ये जग आना जाना,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
Kya Tan Manjta Re (Original) | Indie Routes Live | NCPA | Aabhas & Shreyas
Kya Tan Maanjata Re,
Ek Din Maati Mein Mil Jaana,
Kya Tan Maanjata Re,
Ek Din Maati Mein Mil Jaana,
Hava Chale Ud Jaana Re Pagale (Ho),
Pavan Chale Ud Ja Re Pagale,
Samay Difolt Pachhataana,
Samay Difolt Pachhataana,
Kya Tan Maanjata Re,
Ek Din Maati Mein Mil Jaana.
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना,
पवन चले उड़ जाना रे पगले,
समय चूक पछताना,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
Ek Din Maati Mein Mil Jaana,
Kya Tan Maanjata Re,
Ek Din Maati Mein Mil Jaana,
Hava Chale Ud Jaana Re Pagale (Ho),
Pavan Chale Ud Ja Re Pagale,
Samay Difolt Pachhataana,
Samay Difolt Pachhataana,
Kya Tan Maanjata Re,
Ek Din Maati Mein Mil Jaana.
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना,
पवन चले उड़ जाना रे पगले,
समय चूक पछताना,
क्या तन माँजता रे,
एक दिन माटी में मिल जाना।
Composer : Shreyas & Aabhas
Vocals : Shreyas & Aabhas
Mandolin : Shreyas
Electric Guitar : Hrishi
Darbuka : Kahaan
Percussions : Aryaman
Bass Guitar : Paapu
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Vocals : Shreyas & Aabhas
Mandolin : Shreyas
Electric Guitar : Hrishi
Darbuka : Kahaan
Percussions : Aryaman
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