अरी ओ राधा रानी ले जाऊँगा उठा के

अरी ओ राधा रानी ले जाऊँगा उठा के


अरी ओ राधा रानी, ले जाऊँगा उठा के,
डोली में बिठा के।
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥

चुरा के माखन घर-घर का, दिल मेरा ललचाए,
चोरी-चोरी चुपके-चुपके, सबको बड़ा सताए।
माखन चुराने वाला… मटकी फोड़ने वाला…
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥
अरी ओ राधा रानी, ले जाऊँगा उठा के…॥

कैसे मिलन हमारा होगा, तू काली, मैं गोरी,
मैया कहती — नहीं बनेगी, तेरी-मेरी जोड़ी।
अरी माँ को मना ले… मैया को समझा ले…
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥
अरी ओ राधा रानी, ले जाऊँगा उठा के…॥

चलो मनाएँ यमुना तट पर, एक अनोखा स्वंवर,
मोर मुकुट का मेरा सेहरा, साड़ी तेरी पीतांबर।
मैया को मना ले… बाबा को समझा ले…
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥
अरी ओ राधा रानी, ले जाऊँगा उठा के…॥


अरी ओ राधा रानी ले जाऊंगा उठा के, डोली में बिठा के शादी भजन WITH LYRICS IN DESCRIPTION BOX

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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