अरी ओ राधा रानी ले जाऊँगा उठा के
अरी ओ राधा रानी ले जाऊँगा उठा के
अरी ओ राधा रानी, ले जाऊँगा उठा के,
डोली में बिठा के।
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥
चुरा के माखन घर-घर का, दिल मेरा ललचाए,
चोरी-चोरी चुपके-चुपके, सबको बड़ा सताए।
माखन चुराने वाला… मटकी फोड़ने वाला…
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥
अरी ओ राधा रानी, ले जाऊँगा उठा के…॥
कैसे मिलन हमारा होगा, तू काली, मैं गोरी,
मैया कहती — नहीं बनेगी, तेरी-मेरी जोड़ी।
अरी माँ को मना ले… मैया को समझा ले…
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥
अरी ओ राधा रानी, ले जाऊँगा उठा के…॥
चलो मनाएँ यमुना तट पर, एक अनोखा स्वंवर,
मोर मुकुट का मेरा सेहरा, साड़ी तेरी पीतांबर।
मैया को मना ले… बाबा को समझा ले…
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥
अरी ओ राधा रानी, ले जाऊँगा उठा के…॥
डोली में बिठा के।
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥
चुरा के माखन घर-घर का, दिल मेरा ललचाए,
चोरी-चोरी चुपके-चुपके, सबको बड़ा सताए।
माखन चुराने वाला… मटकी फोड़ने वाला…
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥
अरी ओ राधा रानी, ले जाऊँगा उठा के…॥
कैसे मिलन हमारा होगा, तू काली, मैं गोरी,
मैया कहती — नहीं बनेगी, तेरी-मेरी जोड़ी।
अरी माँ को मना ले… मैया को समझा ले…
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥
अरी ओ राधा रानी, ले जाऊँगा उठा के…॥
चलो मनाएँ यमुना तट पर, एक अनोखा स्वंवर,
मोर मुकुट का मेरा सेहरा, साड़ी तेरी पीतांबर।
मैया को मना ले… बाबा को समझा ले…
मैं मोहन मुरलीवाला हूँ, कोई और नहीं,
अरी मैं तेरा चाहने वाला हूँ, कोई और नहीं॥
अरी ओ राधा रानी, ले जाऊँगा उठा के…॥
अरी ओ राधा रानी ले जाऊंगा उठा के, डोली में बिठा के शादी भजन WITH LYRICS IN DESCRIPTION BOX
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मोहन की मुरली की तान और राधा के प्रति उनका प्रेम ऐसा है, जो हर दिल को छू लेता है। वह राधा रानी को डोली में बिठाकर ले जाने को तैयार है, क्योंकि वह कोई और नहीं, बल्कि राधा का सच्चा चाहने वाला मुरलीधर है। उसका प्रेम शरारतों में भी झलकता है—चुपके-चुपके माखन चुराना, मटकियाँ फोड़ना, और गोकुल की गलियों में सबको सताना। यह उसकी चंचलता है, जो हर किसी को लुभाती है, और राधा के दिल को तो खास तौर पर ललचाती है।
राधा और मोहन का मिलन आसान नहीं, क्योंकि दुनिया की नज़रों में राधा गोरी और श्याम काला है। मईया कहती है कि यह जोड़ी नहीं बनेगी, पर मोहन का प्रेम किसी रुकावट को नहीं मानता। वह माँ को मनाने, मईया को समझाने को तैयार है, क्योंकि उसका दिल बस राधा के लिए धड़कता है। उसकी यह ज़िद और प्रेम की गहराई ही उसे अनूठा बनाती है।
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श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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राधा और मोहन का मिलन आसान नहीं, क्योंकि दुनिया की नज़रों में राधा गोरी और श्याम काला है। मईया कहती है कि यह जोड़ी नहीं बनेगी, पर मोहन का प्रेम किसी रुकावट को नहीं मानता। वह माँ को मनाने, मईया को समझाने को तैयार है, क्योंकि उसका दिल बस राधा के लिए धड़कता है। उसकी यह ज़िद और प्रेम की गहराई ही उसे अनूठा बनाती है।
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Author - Saroj Jangir
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