खींचे खींचे रे दुशासन मेरो चीर अरज सुनो गिरधारी

खींचे खींचे रे दुशासन मेरो चीर अरज सुनो गिरधारी


खींचे खींचे रे दुशासन मेरो चीर अरज सुनो गिरधारी
हस्तिनापुर में जाकर देखो, महफ़िल हो गई भारी
कौरव पांडव सभा बीच में, खड़ी द्रोपती नारी
उनके नैनों से बरस रहो नीर, सुनो गिरधारी

पाँचों पांडव ऐसे बैठे, जैसे अबला नारी
द्रोपती अपने मन में सोचे, दुर्गति भाई हमारी
नहीं है, नहीं है रे धरैया कोई धीर, अरज सुनो गिरधारी

वो दिन याद करो कन्हैया, उंगली कटी तुम्हारी
दोनों हाथों पट्टी बांधी, चीर के अपनी साड़ी
आ गई आ गई रे, कन्हैया तेरी याद, अरज सुनो गिरधारी

राधा छोड़ी रुक्मण छोड़ी, छोड़ी गरुण सवारी
नंगे पैर कन्हैया आए, ऐसे प्रेम पुजारी
बच गई बच गई, द्रोपती जी की लाज, अरज सुनो गिरधारी

खींचत चीर दुशासन हारो, हार गया बलधारी
दुर्योधन की सभा बीच में, चकित हुए नर-नारी
बढ़ गया बढ़ गया रे, हजारों गज चीर, अरज सुनो गिरधारी

साड़ी है कि नारी है, कि नारी बीच साड़ी है
नारी ही की साड़ी है, कि साड़ी ही की नारी है
कैसे बढ़ गया रे, हजारों गज चीर, अरज सुनो गिरधारी

चीर बढ़ने की कोई न जाने, जाने कृष्ण मुरारी
चीर के भीतर आप विराजे, बनके निर्मल साड़ी
ऐसे बढ़ गए रे, हजारों गज चीर, अरज सुनो गिरधारी


खींचे खींचे रे दुशासन मेरो चीर अरज सुनो गिरधारी - प्यारा भजन | Khiche Khiche Re Dusashan Mera Chir

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Song - Khiche Khiche Re Dusashan Mera Chir Araj Suno Girdhari
Artist - Siya
Singer - Chanchal Prajapati
Lyrics - Traditional
Music - Naman Gujral

हस्तिनापुर की सभा में द्रौपदी की पुकार गूँज रही है, जहाँ कौरव-पांडव के बीच उनकी इज्जत पर संकट मंडरा रहा है। दुःशासन उनका चीर खींच रहा है, और उनके नैनों से आँसुओं की धारा बह रही है। पाँचों पांडव असहाय बैठे हैं, मानो वे भी अबला हों। द्रौपदी मन में अपनी दुर्गति पर दुखी है, और कोई धीरज देने वाला नहीं दिखता।

वह उस दिन को याद करती है, जब कन्हैया की उंगली कट गई थी, और उसने अपनी साड़ी फाड़कर उनकी पट्टी बाँधी थी। उस प्रेम की स्मृति में वह गिरधारी को पुकारती है। राधा, रुक्मिणी और गरुड़ की सवारी छोड़कर, नंगे पाँव कन्हैया दौड़े चले आते हैं। उनकी कृपा से द्रौपदी की लाज बच जाती है।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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