जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई मेरे तो भाग्य उजागर

जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई मेरे तो भाग्य उजागर

 
जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई मेरे तो भाग्य उजागर

जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर हैं,
भाग्य उजागर हैं मेरे तो,
नटवर नागर हैं,
जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर हैं।।

नंद के घर में बजी बधाई,
झूम रहे सब ग्वाले,
कंस के कारागृह के कान्हा,
तोड़ दिए सब ताले,
यशोदा मैया झूम के बोली,
मेरो तो मुरली मनोहर है,
जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर हैं।।

तीन लोक के स्वामी जन्मे,
मंद-मंद मुस्काए,
बन के औघड़ शिव शंकर जी,
दर्शन करने आए,
नज़र उतारे यशोदा मैया,
कन्हैया कितना सुंदर है,
जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर हैं।।

कान्हा, तेरी सूरत पर है,
ये दुनिया बलिहारी,
हम सब पर भी कृपा करना,
मेरे श्याम बिहारी,
वसुंधरा करती है विनती,
दोनों हाथ जोड़ कर है,
जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर हैं।।

जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर हैं,
भाग्य उजागर हैं मेरे तो,
नटवर नागर हैं,
जब से जन्मे कृष्ण कन्हाई,
मेरे तो भाग्य उजागर हैं।।


जन्मे है कृष्ण कन्हाई - Jab Janme Krishan Kanhai - Vasundhara Goswami - Krishna Janmashtami Song

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गोकुल की उस भोर का चित्र मानो समय से परे जा खड़ा होता है—जब कन्हैया का जन्म हुआ, तब धरती की हर कणिका जैसे मुस्कराने लगी। वातावरण में ऐसी शांति और उल्लास था कि पशु-पक्षी तक नाच उठे। यह केवल एक बालक का जन्म नहीं, बल्कि आशा का पुनर्जन्म था। कारागार की जंजीरें टूटीं, अधर्म का भय मिटा, और जननी यशोदा की आँखों में स्नेह का सागर उमड़ पड़ा। उस क्षण ने मानो यह कहा—“जहाँ प्रेम का जन्म होता है, वहाँ बंधन टिक नहीं सकते।” कृष्ण के रूप में जन्मा यह बाल स्वरूप केवल देवकी की गोद का नहीं, सम्पूर्ण मानवता के हृदय का उजाला बन गया।

जिस क्षण से जगत के स्वामी (श्री कृष्ण) ने जन्म लिया, उस दिन से न केवल ब्रजवासियों के, बल्कि हम सभी के भाग्य के द्वार खुल गए हैं। सोचिए, जब वे नंद के घर में आते हैं तो चारों ओर बधाई बजती है, ग्वाले खुशी से झूम उठते हैं, और यहाँ तक कि कंस के कारागार के ताले भी स्वयं टूट जाते हैं—यह सब उनकी लीला की शक्ति और उनके आगमन के मंगलमय प्रभाव को दर्शाता है। यह आनंद इतना गहरा है कि माता यशोदा भी उन्हें देखकर गर्व से झूम उठती हैं और उन्हें अपना मुरली मनोहर कहकर पुकारती हैं। उनका यह अवतरण हमें सिखाता है कि जीवन में सच्चा सौभाग्य और आनंद तभी आता है जब हम उस नटवर नागर के साथ अपने हृदय का संबंध जोड़ लेते हैं।
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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