लेजा लेजा रे भलाई जग में जीना भजन
लेजा लेजा रे भलाई जग में जीना थोड़ा भजन
ले जा, ले जा रे भलाई,
जग में जीना थोड़ा रे।।
अरे, एक दिन जन्म लियो,
माता कर कोख करेड़ा रे,
बाहर आकर भूल गए तू,
वादा तेरा रे,
ले जा, ले जा रे भलाई,
जग में जीना थोड़ा रे।।
आई जवानी, भयो दीवाना,
चले टेढ़ा रे,
मां-बाप को कहनू न माने,
खावे-खावे बछेड़ा रे,
ले जा, ले जा रे भलाई,
जग में जीना थोड़ा रे।।
एक दिन थारा छोड़ें आशी,
कर्म करेड़ा रे,
धर्मराज थारा लेखा लेसी,
लंबा चौड़ा रे,
ले जा, ले जा रे भलाई,
जग में जीना थोड़ा रे।।
भाईबंध और कुटुम्ब कबीलो,
कोई नहीं तेरा रे,
ले जा, ले जा रे भलाई,
जग में जीना थोड़ा रे।।
ले जा, ले जा रे भलाई,
जग में जीना थोड़ा रे।।
जग में जीना थोड़ा रे।।
अरे, एक दिन जन्म लियो,
माता कर कोख करेड़ा रे,
बाहर आकर भूल गए तू,
वादा तेरा रे,
ले जा, ले जा रे भलाई,
जग में जीना थोड़ा रे।।
आई जवानी, भयो दीवाना,
चले टेढ़ा रे,
मां-बाप को कहनू न माने,
खावे-खावे बछेड़ा रे,
ले जा, ले जा रे भलाई,
जग में जीना थोड़ा रे।।
एक दिन थारा छोड़ें आशी,
कर्म करेड़ा रे,
धर्मराज थारा लेखा लेसी,
लंबा चौड़ा रे,
ले जा, ले जा रे भलाई,
जग में जीना थोड़ा रे।।
भाईबंध और कुटुम्ब कबीलो,
कोई नहीं तेरा रे,
ले जा, ले जा रे भलाई,
जग में जीना थोड़ा रे।।
ले जा, ले जा रे भलाई,
जग में जीना थोड़ा रे।।
लेजा लेजा रे भलाई जग में जीना थोड़ा रे!! चेतावनी भजन!! सिंगर - प्यारेलाल मीना ।। 9887024134
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जग का जीना थोड़ा सा है, भलाई लेते चलो ना। एक दिन माँ की कोख से निकले, वादा भूल गए बाहर आकर, जवानी में दीवाने होकर माँ-बाप की नहीं सुनी। खा-पीकर बिगड़ गए, टेढ़ी राह चले, लेकिन आशीर्वाद छोड़कर जाना पड़ता है। धर्मराज लेखा लेगा लंबा-चौड़ा, भाई-बंधु कबीले कोई साथ न दे पाएंगे।
सोच लो भाई, जीवन की ये दौड़ में कितना कुछ छूट जाता है, बस अच्छे कर्म ही साथ चलेंगे। माता-पिता का आशीष पकड़ लो, जवानी में संभल जाओ, तो अंत समय में मन शांत रहेगा। ये बात सुनकर मन झकझोर जाता है ना, बस प्रेम और भलाई से जीयो तो सब कुछ संवर जाता है, दिल कहता है यही असली धन है जो कभी न खोए।
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Author - Saroj Jangir
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