अमृत को छोड़ कर जहर काहे पीजे भजन

अमृत को छोड़ कर जहर काहे पीजे भजन

अमृत को छोड़ कर,
जहर काहे पीजे,
राम नाम लीजे,
और सदा मौज कीजे।

मीठा राम नाम है,
और मीठी राम की कथा,
मीठा राम रूप से,
कहो कौन है भला,
बोलो इस मिठास पे,
कौन नहीं रीझे,
राम नाम लीजे,
और सदा मौज कीजे।

लोभ की नाव हो,
और मोह पतवार हो,
छल का छिद्र हो तो,
कैसे बेड़ा पार हो,
अपने ही कर्म पर,
अब काहे खीझे,
राम नाम लीजे,
और सदा मौज कीजे।

तेरे मेरे की कड़ी,
धूप चिलचिला रही,
लोभ की गर्म हवा,
हृदय को जला रही,
राम कृपा की घनी,
छाँव तले रीजे,
राम नाम लीजे,
और सदा मौज कीजे।

देख तेरी दीनता,
पाप में मलीनता,
विषयों में लीनता,
साधनों से हीनता,
राम के सिवाय कहो,
किसका दिल पसीजे,
राम नाम लीजे,
और सदा मौज कीजे।

अमृत को छोड़ कर,
जहर काहे पीजे,
राम नाम लीजे,
और सदा मौज कीजे।



Amrit Ko Chodkar Jaher [Full Song] Ram Naam Lije Sada Mauj Kije

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Bhajan: Amrit Ko Chodhkar Jeher Kaahe Peeje
Singer: Banwari Lal
Music Director: Sardar Gurmeet
Lyricist: Traditional
Album: Ram Naam Leeje Sada Mauj Keeje
Music Label: T-Series
 
साधक राजघराने की रानी मीरा को भक्ति की सच्ची सयानी मानता है, जो कुल की ऊँचाई को तजे हुए गुरु वचन पर दृढ़ है। धन-माया के भरे खजाने को ठुकराकर कृष्ण कन्हैया को ही पति बनाया, विष को अमृत बना लिया और सत्य नाम में दिन-रात लीन हो गई। रविदास गुरु की शरण में जान बिगोने को तैयार होकर भक्ति का मार्ग चुना, संसार की चिंताओं को छोड़ दिया।

मीरा बाई भक्ति की अमर निशानी हैं, राजमहल छोड़कर श्याम के प्रेम में डूब गईं और हर विपत्ति को सहज पार कर लिया। उनका स्वरूप त्याग, निष्ठा और प्रेम का प्रतीक है, जो साधक को सिखाता है कि सच्ची जाति भक्ति में बसती है। कृष्ण कन्हैया उनकी रक्षा करते हैं, नाम जप से जीवन पार हो जाता है और हृदय शांति से भर उठता है। 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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