हम परदेशी पंछी रे साधु भाई कबीर भजन
हम परदेशी पंछी रे साधु भाई कबीर भजन
-साखी-हम वासी वा देश के ,और धरण गगन दोई नाई ।
शब्द मिलावा हो रहा, और देह मिलावा नाई ।।
बिन पवन का पंत है, और बिन बस्ती का देश ।
बिना पिंड का पुरुष है, और कहै कबीर संदेश ।।
सिरगुण की सेवा करो, और निर्गुण का करो ध्यान।
अरे निर्गुण सिरगुण के परे, और तहाँ हमारा ध्यान।।
शब्द मिलावा हो रहा, और देह मिलावा नाई ।।
बिन पवन का पंत है, और बिन बस्ती का देश ।
बिना पिंड का पुरुष है, और कहै कबीर संदेश ।।
सिरगुण की सेवा करो, और निर्गुण का करो ध्यान।
अरे निर्गुण सिरगुण के परे, और तहाँ हमारा ध्यान।।
भजन लिरिक्स
हम परदेशी पंछी रे साधु भाई, इणी देश का नाहीं,
इणी देश रा लोग अचेता, पलपल परलय में जाई।टेक।
१ मुख बिन बोलना पग बिन चलना बिना पंखों से उड़ जाई ।
इना सूरत की लोय हमारी, अनहद माई ( ठहराई ) ओलखाई ॥
हम परदेशी पंछी रे साधु भाई, इणी देश का नाहीं,
इणी देश रा लोग अचेता, पलपल परलय में जाई।टेक।
२ छाया में बैठूं तो अग्नि सी लागे, धूप बहुत शितलाई ।
छाया धूप से मोरे सतगुरू न्यारा, मै सतगुरू के माई ॥
हम परदेशी पंछी रे साधु भाई, इणी देश का नाहीं,
इणी देश रा लोग अचेता, पलपल परलय में जाई।टेक।
3. आठों पहर अड़ा रहे आसन, कबहूँ न उतरेगा साँई ।
ज्ञानी रे ध्यानी पचपच मर गया, उणी देश केरा माई ॥
हम परदेशी पंछी रे साधु भाई, इणी देश का नाहीं,
इणी देश रा लोग अचेता, पलपल परलय में जाई।टेक।
4. निर्गुण रूपी है मेरे दाता, सिरगुण नाम धराई ।
मन पवन दोनों नहीं पहुँचे, उणी देश केरा माई ॥
हम परदेशी पंछी रे साधु भाई, इणी देश का नाहीं,
इणी देश रा लोग अचेता, पलपल परलय में जाई।टेक।
5. नख - शिख नैन शरीर हमारा, सतगुरू अमर कराई ।
कहै कबीर मिलो निर्गुण से, अजर अमर हो जाई
हम परदेशी पंछी रे साधु भाई, इणी देश का नाहीं,
इणी देश रा लोग अचेता, पलपल परलय में जाई।टेक।
भजन श्रेणी : कबीर भजन (Read More : Kabir Bhajan)
हम परदेसी पंछी साधो इणी देश का नाही || Hum Pardesi Panchhi re Sadhu bhai
Saakhi- Ham Vaasi Va Desh Ke ,aur Dharan Gagan Doi Nai .
Shabd Milaava Ho Raha, Aur Deh Milaava Nai ..
Bin Pavan Ka Pant Hai, Aur Bin Basti Ka Desh .
Bina Pind Ka Purush Hai, Aur Kahai Kabir Sandesh ..
Siragun Ki Seva Karo, Aur Nirgun Ka Karo Dhyaan.
Are Nirgun Siragun Ke Pare, Aur Tahaan Hamaara Dhyaan..
Bhajan Liriks
Ham Paradeshi Panchhi Re Saadhu Bhai, Ini Desh Ka Naahin,
Ini Desh Ra Log Acheta, Palapal Paralay Mein Jai.tek.
Shabd Milaava Ho Raha, Aur Deh Milaava Nai ..
Bin Pavan Ka Pant Hai, Aur Bin Basti Ka Desh .
Bina Pind Ka Purush Hai, Aur Kahai Kabir Sandesh ..
Siragun Ki Seva Karo, Aur Nirgun Ka Karo Dhyaan.
Are Nirgun Siragun Ke Pare, Aur Tahaan Hamaara Dhyaan..
Bhajan Liriks
Ham Paradeshi Panchhi Re Saadhu Bhai, Ini Desh Ka Naahin,
Ini Desh Ra Log Acheta, Palapal Paralay Mein Jai.tek.
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