ऐकला मत छोड़ जो बिणजारा कबीर भजन
ऐकला मत छोड़ जो बिणजारा कबीर भजन
मानव जीवन के लिए कबीर साहेब का सन्देश है की मानव जीवन हम सभी को मिला है. लेकिन गुरु के सानिध्य में आकर, ज्ञान की प्राप्ति पाकर ही हम मानव जीवन के उद्देश्य और इसके महत्त्व को समझ सकते हैं. बिना ज्ञान के यह संभव नहीं है. चतुर और ग्यानी व्यक्ति हँस की भाँती मोती चुगते हैं, मानव जीवन में हरी के नाम का सुमिरन करते हैं, वहीँ काग रूपी व्यक्ति नरक को, (मल प्रदार्थ) को चुनता है.
अच्छी और बुरी वस्तुएं दोनों ही उपलब्ध हैं लेकिन ज्ञान के अभाव में जीवात्मा सांसारिकता में पड़ी रह जाती है, मानव जीवन हीरे के समान है, बिरला ही इसकी पहचान कर सकता है. यह संसार हमारा स्थाई घर नहीं है, दूर देस का मामला है जो बहुत ही जटिल है. साहिब (इश्वर ) ने सभी वस्तुएं हमें दी हैं जिनके माध्यम से हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं .
अच्छी और बुरी वस्तुएं दोनों ही उपलब्ध हैं लेकिन ज्ञान के अभाव में जीवात्मा सांसारिकता में पड़ी रह जाती है, मानव जीवन हीरे के समान है, बिरला ही इसकी पहचान कर सकता है. यह संसार हमारा स्थाई घर नहीं है, दूर देस का मामला है जो बहुत ही जटिल है. साहिब (इश्वर ) ने सभी वस्तुएं हमें दी हैं जिनके माध्यम से हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं .
हंस काग की परख को,
सतगुरू दई है बताय ।
हंसा तो मोती चुगे,
काग नरक पर जाई,
परदेशाँ खोजन गया,
घर हीरा की खान,
काँच मणि का पारखी,
वो क्या करे पहचान।
हीरा पड़ा बाजार में,
रहा छार लिपटाय,
कितने ही मूरख पचि गए,
कोई बिरला ले गया उठाय।
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे
परदेश का है मामला,
टेड़ा घणा, हो प्यारा रै,
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे।
अपणा साहेब जी ने बंगलो बणायो,
बणजारा रे, बणजारा रे,
ऊपर राखियां झरोखा ,
झांक्या करो प्यारा रे,
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे।
अपणा साहेब जीने बाग लगायो,
बणजारा रे, बणजारा रे,
अरे फूलां भरी है छाबड़ी,
पोया करो प्यारा रे,
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे।
अपणा साहेबजी ने कुवलो खणायो (खुदायो),
बणजारा रे, बणजारा रे,
गहरा भरिया नीर वा,
न्हाया करो प्यारा रे,
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे।
कहे कबीर धर्मदास से,
बणजारा रे, बणजारा रे,
सत अमरापुर पावीया,
सौदागिर प्यारा रे,
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे।
सतगुरू दई है बताय ।
हंसा तो मोती चुगे,
काग नरक पर जाई,
परदेशाँ खोजन गया,
घर हीरा की खान,
काँच मणि का पारखी,
वो क्या करे पहचान।
हीरा पड़ा बाजार में,
रहा छार लिपटाय,
कितने ही मूरख पचि गए,
कोई बिरला ले गया उठाय।
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे
परदेश का है मामला,
टेड़ा घणा, हो प्यारा रै,
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे।
अपणा साहेब जी ने बंगलो बणायो,
बणजारा रे, बणजारा रे,
ऊपर राखियां झरोखा ,
झांक्या करो प्यारा रे,
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे।
अपणा साहेब जीने बाग लगायो,
बणजारा रे, बणजारा रे,
अरे फूलां भरी है छाबड़ी,
पोया करो प्यारा रे,
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे।
अपणा साहेबजी ने कुवलो खणायो (खुदायो),
बणजारा रे, बणजारा रे,
गहरा भरिया नीर वा,
न्हाया करो प्यारा रे,
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे।
कहे कबीर धर्मदास से,
बणजारा रे, बणजारा रे,
सत अमरापुर पावीया,
सौदागिर प्यारा रे,
एकला मत छोड़ जो, बणजारा रे,
बणजारा रे।
भजन श्रेणी : कबीर भजन (Read More : Kabir Bhajan)
कबीर भजन !! ऐकला मत छोड़ जो बिणजारा #Singer- Nand Lal Bhat #Live गंगरार #SCMStudio
Hans Kaag Ki Parakh Ko,
Sataguru Dai Hai Bataay .
Hansa To Moti Chuge,
Kaag Narak Par Jai,
Paradeshaan Khojan Gaya,
Ghar Hira Ki Khaan,
Kaanch Mani Ka Paarakhi,
Vo Kya Kare Pahachaan.
Hira Pada Baajaar Mein,
Raha Chhaar Lipataay,
Kitane Hi Murakh Pachi Gae,
Koi Birala Le Gaya Uthaay.
Sataguru Dai Hai Bataay .
Hansa To Moti Chuge,
Kaag Narak Par Jai,
Paradeshaan Khojan Gaya,
Ghar Hira Ki Khaan,
Kaanch Mani Ka Paarakhi,
Vo Kya Kare Pahachaan.
Hira Pada Baajaar Mein,
Raha Chhaar Lipataay,
Kitane Hi Murakh Pachi Gae,
Koi Birala Le Gaya Uthaay.
जीवन की इस यात्रा में आत्मा एक बणजारा है, जो परदेश में भटक रही है। यहाँ मामला टेढ़ा है, रास्ते मुश्किल भरे हैं, इसलिए अकेले मत छोड़ो इसे, प्यारा साथी बनकर चलो। सतगुरू ने साफ बता दिया है कि हंस मोती चुगता है, काग नरक की ओर जाता है। बाहर बाजार में हीरा छार में लिपटा पड़ा है, मूरख उसे देखकर गुजर जाते हैं, लेकिन बिरला कोई उठाकर ले जाता है। काँच की मणि का पारखी क्या करेगा उसकी पहचान? असली खान तो घर के अंदर है, परदेश खोजने गया तो हाथ लगी नहीं।
अपना साहेब जी ने बंगला बनाया है, ऊपर झरोखा रखा है, झाँकते रहो प्यारा। बाग लगाया है, फूलों से भरी छाबड़ी है, पोया करो। कुआँ खुदवाया है, गहरा पानी भरा है, नहाया करो। यह सब अमरापुर का रास्ता है, सच्चा सौदा कर लो। कबीर धर्मदास से कहते हैं कि इस यात्रा में साथ मत छोड़ो, क्योंकि सतगुरू की कृपा से ही अमर लोक मिलता है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कबीर जी की।
Bhajan Tangs :
Bhajan - Ekla Re Mat Chodo
Singer - Nand Lal Bhat
Album - Live GangrarRec.- SCM Studio Mangalwad Chouraha