क्यों पूछते हो श्याम मुझे क्या पसंद है
क्यों पूछते हो श्याम मुझे क्या पसंद है
क्यों पूछते हो श्याम, मुझे क्या पसंद है,
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है।
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है……
नजरों को जिस घड़ी, तेरा दीदार हो गया,
सूरत सलोनी देखते ही, प्यार हो गया।
ये तन ये मन ये जा, तेरी एहसानमंद है,
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है……
जब तू नहीं तो साथ, तेरी याद है मेरे,
तेरी याद से ये दिल-जिगर आबाद है मेरे।
मेरी हर एक साँस में, तेरी सुगंध है,
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है……
रोशन हूँ तेरे नूर से, ये जान लीजिए,
खुद ही बिहारी दास को, पहचान लीजिए।
किसकी जहाँ में इस तरह, किस्मत बुलंद है,
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है……
क्यों पूछते हो श्याम, मुझे क्या पसंद है,
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है।
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है……
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है।
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है……
नजरों को जिस घड़ी, तेरा दीदार हो गया,
सूरत सलोनी देखते ही, प्यार हो गया।
ये तन ये मन ये जा, तेरी एहसानमंद है,
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है……
जब तू नहीं तो साथ, तेरी याद है मेरे,
तेरी याद से ये दिल-जिगर आबाद है मेरे।
मेरी हर एक साँस में, तेरी सुगंध है,
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है……
रोशन हूँ तेरे नूर से, ये जान लीजिए,
खुद ही बिहारी दास को, पहचान लीजिए।
किसकी जहाँ में इस तरह, किस्मत बुलंद है,
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है……
क्यों पूछते हो श्याम, मुझे क्या पसंद है,
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है।
मेरी पसंद आपकी, मुट्ठी में बंद है……
क्यों पूछते हो शाम मुझे क्या पसंद है यह भजन आप को जरूर पसन्द आएगा with lyrics
प्रेम और भक्ति की पराकाष्ठा तब होती है, जब अपनी सारी इच्छाएँ, पसंद-नापसंद, अभिलाषाएँ प्रभु के चरणों में समर्पित हो जाती हैं। मन में यह गहरा भाव है कि अब मुझे कुछ और नहीं चाहिए—जो कुछ भी है, जो कुछ भी चाहिए, वह सब श्याम की मर्जी, उनकी पसंद और उनकी कृपा में ही समाहित है। मेरी पसंद, मेरी चाहत, मेरी हर इच्छा अब आपकी मुट्ठी में बंद है, प्रभु!
जिस क्षण नजरों को श्याम का दीदार हो गया, उसी पल से जीवन का हर रंग, हर स्पंदन, हर चाहत उन्हीं से जुड़ गई। उनकी सलोनी सूरत ने मन को ऐसा बाँध लिया कि तन-मन-जीवन सब उन्हीं का हो गया। अब हर सांस, हर धड़कन, हर भावना उन्हीं के नाम है। यह जीवन, यह मन, यह अस्तित्व—सब श्याम का अहसान मानता है। जब श्याम साथ नहीं होते, तब भी उनकी यादें हर पल साथ रहती हैं। उनकी यादों से ही दिल और जिगर आबाद है। हर सांस में, हर अहसास में, उनकी ही सुगंध बसी है। जीवन का हर क्षण, हर अनुभूति अब श्याम की उपस्थिति से ही रोशन है। श्याम के नूर से जीवन प्रकाशित है, और यही सबसे बड़ी पहचान, सबसे बड़ा सौभाग्य है। संसार में किसकी किस्मत इतनी बुलंद हो सकती है कि उसे श्याम का साथ, उनकी कृपा और उनका प्रेम मिल जाए?
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जिस क्षण नजरों को श्याम का दीदार हो गया, उसी पल से जीवन का हर रंग, हर स्पंदन, हर चाहत उन्हीं से जुड़ गई। उनकी सलोनी सूरत ने मन को ऐसा बाँध लिया कि तन-मन-जीवन सब उन्हीं का हो गया। अब हर सांस, हर धड़कन, हर भावना उन्हीं के नाम है। यह जीवन, यह मन, यह अस्तित्व—सब श्याम का अहसान मानता है। जब श्याम साथ नहीं होते, तब भी उनकी यादें हर पल साथ रहती हैं। उनकी यादों से ही दिल और जिगर आबाद है। हर सांस में, हर अहसास में, उनकी ही सुगंध बसी है। जीवन का हर क्षण, हर अनुभूति अब श्याम की उपस्थिति से ही रोशन है। श्याम के नूर से जीवन प्रकाशित है, और यही सबसे बड़ी पहचान, सबसे बड़ा सौभाग्य है। संसार में किसकी किस्मत इतनी बुलंद हो सकती है कि उसे श्याम का साथ, उनकी कृपा और उनका प्रेम मिल जाए?
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Author - Saroj Jangir
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