गोपियां दे नाल नचदे मेरे कृष्ण मुरार

गोपियां दे नाल नचदे मेरे कृष्ण मुरार


गोपियां दे नाल नचदे मेरे कृष्ण मुरार,
सखियां दे नाल नचदे मेरे कृष्ण मुरार।
अखन च कजल, हथ विच मुरली, सूरत बड़ी कमाल,
गोपियां दे नाल नचदे मेरे कृष्ण मुरार……

वालां विच जिन्ने पंख सजाएआ, 
भोला चेहरा हर मन भाया। (२)
जिन्ने चीची ते चुकेया पहाड़ मेरे कृष्ण मुरार।
गोपियां दे नाल नचदे मेरे कृष्ण मुरार……

देवकी मां दा एह है जाया, 
मात यशोदा दा लाल कहाया। (२)
एह सुधामे दे पक्के ने यार मेरे कृष्ण मुरार।
गोपियां दे नाल नचदे मेरे कृष्ण मुरार……

श्याम ने ऐसा खेल रचाया, 
बिट्टू लोपोके कुज समझ ना पाया। (२)
ओहदी महिमा है अपरंपार मेरे कृष्ण मुरार।
गोपियां दे नाल नचदे मेरे कृष्ण मुरार……


Gopiyan De Naal Nach De Mere Krishna | Shelly Singh | Krishna Janmashtami Bhajan | Krishna Bhajan

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यह भजन भगवान कृष्ण के प्रति गहरे प्रेम और भक्ति को व्यक्त करता है, जिसमें उनकी लीलाओं, सुंदरता और अलौकिकता का वर्णन है। कृष्ण गोपियों और सखियों के साथ नाचते हैं, उनकी मुरली और काजल से सजी आँखें मन को मोह लेती हैं। उनकी सूरत इतनी कमाल है कि हर कोई उनके आकर्षण में खो जाता है। उनके बालों में पंख सजा है, उनका भोला चेहरा हर दिल को लुभाता है। उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर सबको चकित कर दिया। यह उनकी दिव्य शक्ति का प्रतीक है।

कृष्ण देवकी के पुत्र हैं, पर यशोदा के लाल कहलाते हैं। वे अपने भक्तों के सच्चे मित्र हैं, जो सुदामा जैसे भक्तों के साथ अपने प्रेम और उदारता का परिचय देते हैं। उनकी महिमा अपार है, जिसे कोई पूरी तरह समझ नहीं सकता।

कृष्ण मुरार की रासलीला, गोपियों और सखियों के संग उनका नृत्य, ब्रज की सबसे मधुर और दिव्य अनुभूति है। काजल लगी आँखें, हाथ में मुरली, और मनमोहक सूरत—कृष्ण का हर रूप, हर अदा, हर मुस्कान सबका मन मोह लेती है। उनके सिर पर मोरपंख सजा है, भोला-भाला चेहरा है, और उनकी बाल-लीलाएँ हर किसी के दिल में बस जाती हैं। कृष्ण ने अपनी बाल-लीला में गोवर्धन पर्वत को छोटी उंगली पर उठा लिया, जिससे उनकी महिमा और भी बढ़ गई। वे देवकी के पुत्र, यशोदा के लालन और सुदामा के सच्चे मित्र हैं। उनका अपनापन, उनकी मित्रता, और उनका प्रेम हर किसी के लिए प्रेरणा है।

श्याम की लीला इतनी रहस्यमयी और गूढ़ है कि कोई भी उसकी पूरी गहराई को समझ नहीं सकता। उनकी महिमा अपरंपार है—हर युग, हर समय, हर परिस्थिति में वे अपने भक्तों के लिए नए-नए खेल रचते हैं, जिनका रहस्य केवल वही जानते हैं।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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