मेरे गुरुदेव की मुझ पर कृपा एकबार भजन
मेरे गुरुदेव की मुझ पर कृपा एक बार हो जाये
मेरे गुरुदेव की मुझ पर, कृपा एक बार हो जाए,
लगा लूं रज में चरणों की, मेरा उद्धार हो जाए।।
मेरे हो तुम गुरुदेवा, लगाकर मन करूं सेवा,
जगा दो ज्ञान की ज्योति, चमन गुलज़ार हो जाए।।
मेरे गुरुदेव की मुझ पर, कृपा एक बार हो जाए।।
दया के आप हो सागर, मेरी भर दो प्रभु गागर,
बहा दो प्रेम की गंगा, मेरा बेड़ा पार हो जाए।।
मेरे गुरुदेव की मुझ पर, कृपा एक बार हो जाए।।
फंसे हैं मोह-माया में, बिठा लो चरण-छाया में,
शरण में तेरी जो आए, उसका जीवन सार हो जाए।।
मेरे गुरुदेव की मुझ पर, कृपा एक बार हो जाए।।
मेरे गुरुदेव की मुझ पर, कृपा एक बार हो जाए,
लगा लूं रज में चरणों की, मेरा उद्धार हो जाए।।
लगा लूं रज में चरणों की, मेरा उद्धार हो जाए।।
मेरे हो तुम गुरुदेवा, लगाकर मन करूं सेवा,
जगा दो ज्ञान की ज्योति, चमन गुलज़ार हो जाए।।
मेरे गुरुदेव की मुझ पर, कृपा एक बार हो जाए।।
दया के आप हो सागर, मेरी भर दो प्रभु गागर,
बहा दो प्रेम की गंगा, मेरा बेड़ा पार हो जाए।।
मेरे गुरुदेव की मुझ पर, कृपा एक बार हो जाए।।
फंसे हैं मोह-माया में, बिठा लो चरण-छाया में,
शरण में तेरी जो आए, उसका जीवन सार हो जाए।।
मेरे गुरुदेव की मुझ पर, कृपा एक बार हो जाए।।
मेरे गुरुदेव की मुझ पर, कृपा एक बार हो जाए,
लगा लूं रज में चरणों की, मेरा उद्धार हो जाए।।
Mere Gurudev Muj par kripa ek baar ho jaye - By Shambhu Ustad
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सतगुरु की कृपा की एक बूँद भी जीवन को धन्य करने की प्रार्थना की जाती है, ताकि उनके चरणों की रज लगाकर उद्धार हो जाए। मन को उनकी सेवा में लगाकर, ज्ञान की ज्योति जलाने की विनती की जाती है, जिससे जीवन का चमन गुलज़ार हो जाए। सतगुरु दया के सागर हैं, उनसे प्रेम की गंगा बहाकर जीवन की गागर भरने और भवसागर से पार उतरने की प्रार्थना की जाती है। मोह-माया में फँसे मन को उनके चरणों की छाया में बिठाने की गुहार लगाई जाती है, क्योंकि उनकी शरण में आने से कमल-सा जीवन खिल उठता है। यह भजन सतगुरु की कृपा, उनकी शरण में उद्धार, और भक्ति व ज्ञान से जीवन को सार्थक बनाने की भावना को व्यक्त करता है।
सतगुरु देव की क्रिया अर्थात् उनके द्वारा बताई गई साधना या आध्यात्मिक प्रक्रिया का महत्त्व बहुत गहरा है। सतगुरु की क्रिया (साधना) मनुष्य के जीवन को पूर्ण रूप से बदल देती है और उसे परम शांति, मोक्ष तथा सच्चे आनंद की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
सतगुरु देव द्वारा बताई गई सच्ची साधना करने से मनुष्य के सभी दुख-कष्ट दूर हो जाते हैं। वे भक्त को जाति, पंथ, धर्म और रंग के भेदभाव से परे रहना सिखाते हैं और उसे भौतिक बंधनों से मुक्त करते हैं। सतगुरु की क्रिया का पालन करने से मनुष्य का जन्म-मृत्यु और पुनर्जन्म का रोग हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। यही नहीं, सतगुरु देव भक्त को सभी पवित्र शास्त्रों से पूर्ण ज्ञान प्रमाण सहित बताते हैं और उसे मोक्ष प्राप्त करने के सही मार्ग पर ले जाते हैं।
सतगुरु देव द्वारा बताई गई सच्ची साधना करने से मनुष्य के सभी दुख-कष्ट दूर हो जाते हैं। वे भक्त को जाति, पंथ, धर्म और रंग के भेदभाव से परे रहना सिखाते हैं और उसे भौतिक बंधनों से मुक्त करते हैं। सतगुरु की क्रिया का पालन करने से मनुष्य का जन्म-मृत्यु और पुनर्जन्म का रोग हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। यही नहीं, सतगुरु देव भक्त को सभी पवित्र शास्त्रों से पूर्ण ज्ञान प्रमाण सहित बताते हैं और उसे मोक्ष प्राप्त करने के सही मार्ग पर ले जाते हैं।
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Author - Saroj Jangir
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