वो प्यारी वो प्यारी छवि रे छवि बेमिसाल

वो प्यारी वो प्यारी छवि रे छवि बेमिसाल


वो प्यारी, वो प्यारी छवि रे —
छवि बेमिसाल।
वो कारी-कजरारी तेरी आँखें,
माथे केसर तिलक निराल।
वो प्यारी, वो प्यारी छवि रे —
छवि बेमिसाल॥

माखन कान्हा, नेक चखा दे,
बंसुरिया आज मुझे सुना दे।
सोया है संसार, नचा दे,
पनघट पर प्रेम जगा दे, मदन गोपाल।
वो प्यारी, वो प्यारी छवि रे —
छवि बेमिसाल॥

वो तेरा मटके को गिराना,
राधे जी को खूब सताना।
मैया के आगे इठलाना,
वृंदावन में धूम मचाना,
जादू भरी चाल।
वो प्यारी, वो प्यारी छवि रे —
छवि बेमिसाल॥

लेहरी दिल को क्या समझाऊं,
हाल हुआ क्या मैं बतलाऊं?
बोल, तुझे कैसे मैं मनाऊं?
हो जाए दीदार — क्या गाऊं, प्यारे नंदलाल?
वो प्यारी, वो प्यारी छवि रे —
छवि बेमिसाल॥


प्यारी तेरी छवि रे | Beautiful Shyam Bhajan | उमा लहरी | Latest श्याम भजन | HD

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Song: Pyari Teri Chhavi Re
Singer: Uma Lahri
Category: HIndi Devotional ( Shyam Bhajan )
Producers: Amresh Bahadur, Ramit Mathur
Label: Yuki

इस भाव में कृष्ण की अनुपम छवि का मनोहारी वर्णन है। उनकी कजरारी आंखें, माथे पर केसर का तिलक और बालसुलभ शरारतें मन को आकर्षित करती हैं। माखन चुराने की मासूमियत, बांसुरी की मधुर धुन, और वृंदावन में राधा को छेड़ना—इन सब बातों में उनका बालपन, प्रेम और लीलाओं की मिठास झलकती है। रात के सन्नाटे में जब संसार सो रहा है, तब कृष्ण की बांसुरी की तान प्रेम का वातावरण रच देती है। पनघट पर प्रेम का संचार, मटकी फोड़ने की चंचलता, मैया के सामने इठलाना और वृंदावन में आनंद फैलाना—इन सब लीलाओं में कृष्ण की जादुई चाल और अलौकिक आकर्षण प्रकट होता है।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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