ढूंढता है कहाँ श्याम को तू कृष्णा भजन
ढूंढता है कहाँ श्याम को तू कृष्णा भजन
ढूंढता है कहाँ श्याम को तू,क्या उसे तूने पाया नहीं है,
है जगह कौन सी इस जमीं पर,
श्याम जिसमें समाया नहीं है।
कोई कहता यशोदा है मैया,
कोई कहता है हलधर का भैया,
कौन सा ऐसा नाता है जग में,
श्याम ने जो निभाया नहीं है,
ढूँढ़ता है कहाँ श्याम को तू,
क्या उसे तूने पाया नहीं है।
कोई कहता है ब्रज का साँवरिया,
कोई कहता है मथुरा नगरिया,
कोई बतलाये हमको भला ये,
किस जगह उसका साया नहीं है,
ढूँढ़ता है कहाँ श्याम को तू,
क्या उसे तूने पाया नहीं है।
पूतना और बकासुर को मारा,
कंस को भी कन्हैया ने तारा,
पाप है कौन सा पापियों का,
जिसको इसने मिटाया नहीं है,
ढूँढ़ता है कहाँ श्याम को तू,
क्या उसे तूने पाया नहीं है।
कोई कहता है बंशी बजैया,
कोई कहता है रास रचैया,
गीत है कौन सा जिन्दगी का,
श्याम ने जो सुनाया नहीं है,
ढूँढ़ता है कहाँ श्याम को तू,
क्या उसे तूने पाया नहीं है।
ढूंढता है कहाँ श्याम को तू,
क्या उसे तूने पाया नहीं है,
है जगह कौन सी इस जमीं पर,
श्याम जिसमें समाया नहीं है।
भजन श्रेणी : कृष्ण भजन (Krishna Bhajan)
Dhundta hai kahan shyam ko tu/ढूंढता है कहां श्याम को तू
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Dhundhata Hai Kahaan Shyaam Ko Tu,
Kya Use Tune Paaya Nahin Hai,
Hai Jagah Kaun Si Is Jamin Par,
Shyaam Jisamen Samaaya Nahin Hai.
Kya Use Tune Paaya Nahin Hai,
Hai Jagah Kaun Si Is Jamin Par,
Shyaam Jisamen Samaaya Nahin Hai.