देखो तो ज़रा सोचो तो ज़रा दास खड़ा भजन
देखो तो ज़रा सोचो तो ज़रा दास खड़ा भजन
देखो तो ज़रा, सोचो तो ज़रा,
दास खड़ा तेरी ओर निहारे,
देखो तो ज़रा, सोचो तो ज़रा।।
समय का मारा हूँ, वक़्त से हारा हूँ,
अभी हूँ गर्द-ए-राह, छूटा मैं टूटा तारा हूँ,
बिछड़ न जाऊँ, हाथ हमारा पकड़ो तो ज़रा,
भक्तों की गिनती कम न हो, सोचो तो ज़रा,
देखो तो ज़रा, सोचो तो ज़रा।।
अगर मैं घबराया, अगर मैं मुरझाया,
संबल नहीं पाऊँगा, जो तूने ठुकराया,
तुम मालिक, तुम रक्षक मेरे, तुम बिन कौन मेरा,
बीच भँवर में नाव फँसी है, थामो तो ज़रा,
देखो तो ज़रा, सोचो तो ज़रा।।
शरण में आए जो, आँसू छलकाए जो,
प्रेम से, भाव से, श्याम को रिझाए जो,
झोली भर देते हो उसकी, जो है शरण पड़ा,
शरण में पड़ा है कब से, देखो दास तेरा,
देखो तो ज़रा, सोचो तो ज़रा।।
दास खड़ा तेरी ओर निहारे,
देखो तो ज़रा, सोचो तो ज़रा।।
समय का मारा हूँ, वक़्त से हारा हूँ,
अभी हूँ गर्द-ए-राह, छूटा मैं टूटा तारा हूँ,
बिछड़ न जाऊँ, हाथ हमारा पकड़ो तो ज़रा,
भक्तों की गिनती कम न हो, सोचो तो ज़रा,
देखो तो ज़रा, सोचो तो ज़रा।।
अगर मैं घबराया, अगर मैं मुरझाया,
संबल नहीं पाऊँगा, जो तूने ठुकराया,
तुम मालिक, तुम रक्षक मेरे, तुम बिन कौन मेरा,
बीच भँवर में नाव फँसी है, थामो तो ज़रा,
देखो तो ज़रा, सोचो तो ज़रा।।
शरण में आए जो, आँसू छलकाए जो,
प्रेम से, भाव से, श्याम को रिझाए जो,
झोली भर देते हो उसकी, जो है शरण पड़ा,
शरण में पड़ा है कब से, देखो दास तेरा,
देखो तो ज़रा, सोचो तो ज़रा।।
Dekho Toh Zara By Anil Sharma
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जब जीवन की परिस्थितियाँ मनुष्य को चारों ओर से घेर लेती हैं, तब उसे सबसे अधिक आवश्यकता प्रभु के स्नेह, विश्वास और सहारे की होती है। संसार में अनेक संबंध साथ छोड़ सकते हैं, किन्तु ईश्वर का प्रेम कभी अपने भक्त से दूर नहीं होता। टूटे हुए मन की सच्ची पुकार सीधे उनके चरणों तक पहुँचती है और उनकी करुणा निराशा के अंधकार में आशा का दीप जला देती है। भक्त का सबसे बड़ा विश्वास यही होता है कि यदि प्रभु का हाथ सिर पर बना रहे, तो कोई भी कठिनाई स्थायी नहीं रह सकती। उनके चरणों में समर्पण करने से मन का भय दूर होता है और आत्मबल बढ़ने लगता है। सच्चे भाव, विनम्रता और प्रेम से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती, क्योंकि प्रभु अपने शरणागत की रक्षा अवश्य करते हैं। जब मन पूरी तरह उनके भरोसे स्वयं को समर्पित कर देता है, तब जीवन की डगमगाती नैया भी सुरक्षित किनारे की ओर बढ़ने लगती है। यही अटूट विश्वास भक्ति का सबसे बड़ा आधार है। जय श्री श्याम बाबा की!
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Author - Saroj Jangir
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