खोल आडो खोल मारी घाटा री चामुंडा भजन
खोल आडो खोल मारी घाटा री चामुंडा भजन
खोल आडो खोल मारी,घाटा री चामुंडा ये,
आयोडा भगता ने दरसन देवो,
मारी जोग माया ये,
खोल आडो खोल मारी,
घाटा री चामुंडा ये।
घाटा पे बिराजी चामुंडा,
ज्योत थारी जागी,
ढोल ने ढम काढ़े जाग जाओ,
मारी जोगमाया ये,
खोल आडो खोल मारी,
घाटा री चामुंडा ये।
सिंह चढ़ी माँ आवो ये भवानी,
संग में भेरू लावो ये,
धुप ने धुवाडे हेलो देऊ मारी,
जोग माया ये,
खोल आडो खोल मारी,
घाटा री चामुंडा ये।
रात दिन थारी करू ये चाकरी,
घाटा री धणियाणी ये,
एक आस बंधावे,
जागण देऊ मारी जोग माया ये,
खोल आडो खोल मारी,
घाटा री चामुंडा ये।
घाटा री चामुंडा मावड़ी,
हेले बेगि आजे ये,
धरम तंवर थाने अरज करे,
भगता री आस बंधा जे ये,
खोल आडो खोल मारी,
घाटा री चामुंडा ये।
खोल आडो खोल मारी,
घाटा री चामुंडा ये,
आयोडा भगता ने दरसन देवो,
मारी जोग माया ये,
खोल आडो खोल मारी,
घाटा री चामुंडा ये।
खोल आडो खोल घाटा री धणियाणी gata wali mata ji song गायक |धर्मेंद्र तंवर | चामुंडा माता भजन
घाटा की उस ऊँची चट्टान पर, जहाँ हवा में भी माँ की ज्योत की गर्माहट महसूस होती है, वो शक्तिशाली रूप विराजमान है। सिंह पर सवार होकर, भेरू के साथ, ढोल-ढमाके के बीच माँ आती हैं, जैसे कोई माँ अपने बच्चों को बुला रही हो। भक्तों की पुकार सुनकर ज्योत जाग उठती है, धूप की लहरें उठती हैं, और हर मन की आस बंध जाती है। वो जोगमाया, वो भवानी, सब कुछ खोलकर अपना दरबार सजाती हैं, ताकि हर आने वाला अपना बोझ उतार सके और दिल हल्का हो जाए। जैसे कोई पुरानी माँ कहती हो, "बेटा, सब ठीक हो जाएगा, बस मेरे पास आ जा।"
रात-दिन चाकरी करते, एक ही आस में बंधे रहते हैं लोग, क्योंकि माँ की कृपा से ही जीवन की हर मुश्किल आसान हो जाती है। घाटा की धणियाणी, चामुंडा मावड़ी, वो सबकी रक्षा करती हैं, मनोकामनाएँ पूरी करती हैं। अरज सुनती हैं, भक्तों की पुकार पर बेगि आती हैं। ये विश्वास दिल को मजबूती देता है कि जब माँ का हाथ सिर पर हो, तो डर किस बात का। हर पुकार में वो जवाब देती हैं, हर आंसू को पोंछती हैं, और जीवन को नई रोशनी से भर देती हैं।
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