मन मेरा आखदा शेरेआलिये मातारानी भजन
मन मेरा आखदा शेरेआलिये,
इक वारी दर्श दिखा,
ओ दातिये इक वारी दर्श दिखा,
शेरांवालिये ओ मेहरावालिये,
शेरांवालिये ओ मेहरावालिये,
मन मेरा आखदा शेरेआलिये।
विच पहाड़े मंदिर तेरा,
लाया ही भगते डेरा,
लाया ही भगते डेरा,
लाया ही भगते डेरा,
भेंटा गाई गाई नचदे ने,
सारे करदे ने दर्शन तेरा,
करदे ने दर्शन तेरा,
करदे ने दर्शन तेरा,
लांदे जयकारे भेंटा वी,
गांदे इक वारी फेरा पा,
ओ दातिये इक वारी फेरा पा,
मन मेरा आखदा शेरेआलिये।
अंदर मैया तेरी ज्योत चमकदी,
बाहर पवे लिशकारा,
बाहर पवे लिशकारा,
बाहर पवे लिशकारा,
जय जय मैया शेरेआली,
लांदे लोग जयकारा,
लांदे लोग जयकारा,
लांदे लोग जयकारा,
झोलियां तू भरनी,
दुखड़े तू हरनी,
मेरे वी कष्ट मिटा,
ओ दातिये मेरे वी कष्ट मिटा,
मन मेरा आखदा शेरेआलिये।
पापीगे तू पले च मारे,
चंडी दा रूप बनाइये,
चंडी दा रूप बनाइये,
चंडी दा रूप बनाइये,
भगतेगी तू करे जे तारे,
वैष्णों दा रूप बनाइये,
वैष्णों दा रूप बनाइये,
वैष्णों दा रूप बनाइये,
असी वी तारी जा शेरेआलिये,
इक वारी तू सामने आ,
ओ दातिये इकवारी तू सामने आ,
मन मेरा आखदा शेरेआलिये।
सावन महीना आ गया,
माँ दा असे प्रीता लाईया,
असे प्रीता लाईया,
असे प्रीता लाईया,
भगतेगी तुगी याद ना आई,
लमिया तरीका पाईया,
लमिया तरीका पाईया,
लमिया तरीका पाईया,
नरातेयां च लगदा मेला नी दातिये,
मने आला मुखटा रिझा,
ओ दातिये मने आला मुखटा रिझा,
मन मेरा आखदा शेरेआलिये।
इक वारी दर्श दिखा,
ओ दातिये इक वारी दर्श दिखा,
शेरांवालिये ओ मेहरावालिये,
शेरांवालिये ओ मेहरावालिये,
मन मेरा आखदा शेरेआलिये।
विच पहाड़े मंदिर तेरा,
लाया ही भगते डेरा,
लाया ही भगते डेरा,
लाया ही भगते डेरा,
भेंटा गाई गाई नचदे ने,
सारे करदे ने दर्शन तेरा,
करदे ने दर्शन तेरा,
करदे ने दर्शन तेरा,
लांदे जयकारे भेंटा वी,
गांदे इक वारी फेरा पा,
ओ दातिये इक वारी फेरा पा,
मन मेरा आखदा शेरेआलिये।
अंदर मैया तेरी ज्योत चमकदी,
बाहर पवे लिशकारा,
बाहर पवे लिशकारा,
बाहर पवे लिशकारा,
जय जय मैया शेरेआली,
लांदे लोग जयकारा,
लांदे लोग जयकारा,
लांदे लोग जयकारा,
झोलियां तू भरनी,
दुखड़े तू हरनी,
मेरे वी कष्ट मिटा,
ओ दातिये मेरे वी कष्ट मिटा,
मन मेरा आखदा शेरेआलिये।
पापीगे तू पले च मारे,
चंडी दा रूप बनाइये,
चंडी दा रूप बनाइये,
चंडी दा रूप बनाइये,
भगतेगी तू करे जे तारे,
वैष्णों दा रूप बनाइये,
वैष्णों दा रूप बनाइये,
वैष्णों दा रूप बनाइये,
असी वी तारी जा शेरेआलिये,
इक वारी तू सामने आ,
ओ दातिये इकवारी तू सामने आ,
मन मेरा आखदा शेरेआलिये।
सावन महीना आ गया,
माँ दा असे प्रीता लाईया,
असे प्रीता लाईया,
असे प्रीता लाईया,
भगतेगी तुगी याद ना आई,
लमिया तरीका पाईया,
लमिया तरीका पाईया,
लमिया तरीका पाईया,
नरातेयां च लगदा मेला नी दातिये,
मने आला मुखटा रिझा,
ओ दातिये मने आला मुखटा रिझा,
मन मेरा आखदा शेरेआलिये।
Man Tera Aakhda Shere Aaliaye Ek Baar Darsh dikha by vijay ji
मन आह्वान करता है शेरावालिये, एक बार दर्शन दे दो दाता। विच पहाड़ी मंदिर में भक्त डेरा डाले भेंट चढ़ाते हैं, गाई-गाई नाचते हुए जयकारे लगाते हैं, फेरा पाते ही सुकून मिल जाता है। अंदर ज्योत चमकती है, बाहर लिशकारा गूंजता है, झोलियाँ भरनी हैं, दुखड़े हरने हैं। इश्वर का आशीर्वाद हर पुकार पर बरसता रहता है।
पापियों को चंडी रूप में मारने वाली, भक्तों को वैष्णो रूप में तारने वाली माँ, सावन में प्रीति लाई हो तो लम्हों का मेला सज जाता है। मुखटा रिझाने को जी चाहता है, सामने आकर कष्ट मिटा दो। साधक को लगता है जैसे हर रूप में माँ का प्यार ही छिपा हो। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री शेरावाली माँ जी की।
पापियों को चंडी रूप में मारने वाली, भक्तों को वैष्णो रूप में तारने वाली माँ, सावन में प्रीति लाई हो तो लम्हों का मेला सज जाता है। मुखटा रिझाने को जी चाहता है, सामने आकर कष्ट मिटा दो। साधक को लगता है जैसे हर रूप में माँ का प्यार ही छिपा हो। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री शेरावाली माँ जी की।
