सखी री राधा वल्लभ से हमारी लड़ गई अँखियाँ भजन

सखी री राधा वल्लभ से हमारी लड़ गई अँखियाँ भजन


सखी री राधा वल्लभ से,
हमारी लड़ गई अँखियाँ।
बचाई थी बहुत लेकिन,
निगोड़ी लड़ गई अँखियाँ॥

ना जाने क्या किया जादू,
ये तकती रह गई अँखियाँ।
चमकती हाय बरछी सी,
कलेजे गड़ गई अँखियाँ।
सखी री बाँके बिहारी से,
हमारी लड़ गई अँखियाँ॥

चहुँ दिश रस भरी चितवन,
मेरी आँखों में लाते हो।
कहो कैसे, कहाँ जाऊँ,
यह पीछे पड़ गई अँखियाँ।
सखी री बाँके बिहारी से,
हमारी लड़ गई अँखियाँ॥

भले तन से ये निकले प्राण,
मगर यह छवि ना निकलेगी।
अँधेरे मन के मंदिर में,
मणि सी गड़ गई अँखियाँ।
सखी री बाँके बिहारी से,
हमारी लड़ गई अँखियाँ॥

सखी री राधा वल्लभ से,
हमारी लड़ गई अँखियाँ।
बचाई थी बहुत लेकिन,
निगोड़ी लड़ गई अँखियाँ॥



सखी री राधावल्लभ से हमारी लड़ गई अखियाँ || मधुर भजन || Abhishek Tiwari ||

ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.

भजन प्रवाहक:- अभिषेक तिवारी 
तबला:- विकास शर्मा 
कोरस:- अनुपम पांडेय,मनजीत, अनुज 
बेंजो:- सूरज शर्मा
 
तेरी झलक ने आँखों की हर ठहरती धड़कन चुरा ली; जो कभी शांत थी, अब बंजर सी राहों में बस उसी एक नज़र की प्यास लिए भटकती है। वैसी आँखें जो दुनिया की रौनक देखती थीं, अब हर दिशा में उसी राधा-वल्लभ की छवि खोज बैठती हैं, और हर चमक एक बरछी-सी सीधा सीने में उतर जाती है। नज़र का जादू इतना तीक्ष्ण कि वह भीतर की हर सतह पर अपना प्रतिबिंब छोड़ दे — रात की खामोशी में भी वह तस्वीर चमक उठती है और चैन का साँस थम-सा जाता है। प्राण भी निकल पड़े पर वह रूप न हटे—ऐसा विश्वास आँखों में बैठ गया कि हर पल तेरा चेहरा ही मंदिर बन गया। सखी के राधा-वल्लभ से मिली वो आँखे अब न संभलने वाली बंदूक बन गई हैं; बचाने की जितनी भी कोशिश हुई, सारी निगोड़ी तबाह होकर उसी दिव्य प्रेम के आगे झुक गईं। 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर कृष्णा भजन, जन्माष्टमी भजनभजनों का संग्रह । इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल/Lyrics उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें। 

Visit Home Page

Next Post Previous Post