शिव की नगरिया मन भा गयी शिव भजन

शिव की नगरिया मन भा गयी शिव भजन

बरसे बदरिया हौले हौले,
हौले हौले,
दर्शन को मन मेरा डोले,
मेरा डोले,
बरसे बदरिया हौले हौले,
हौले हौले,
दर्शन को मन मेरा डोले,
तेरी नगरिया मन भा गई,
शिव की डगरिया मन भा गई।

बरसे बदरिया हौले हौले,
हौले हौले,
दर्शन को मन मेरा डोले,
मेरा डोले,
बरसे बदरिया हौले हौले,
हौले हौले,
दर्शन को मन मेरा डोले,
तेरी नगरिया मन भा गई,
तेरी नगरिया मन भा गई।

चरणों में ध्यान लगाऊंगा,
तेरा ही गुण बाबा गाऊंगा,
सोया नसीबा जगाऊंगा,
दार से तेरे मैं ना जाऊंगा,
बाबा कर दो करम,
तोड़ो ना भरम,
भोले जान लो तुम,
मेरे दिल का मरहम।

तू ही नसीबा खोले खोले,
खोले खोले,
दुखड़े मिटाओ मेरे भोले,
मेरे भोले,
तू ही नसीबा खोले खोले,
खोले खोले,
दुखड़े मिटाओ मेरे भोले,
तेरी नगरिया मन भा गई,
तेरी नगरिया मन भा गई,
जय हो जय हो।

गिरतो को तू ही उठाता है,
भटको को रास्ता दिखाता है,
बिगड़ी हर बात बनाता है,
दुनिया को पार लगता है,
धरती अंबर में तू,
और समंदर में तू,
पूजा सारा जहां,
दिल के मंदिर में तू,
दिल का पपीहा बोले बोले,
बोले बोले,
दया के सागर मेरे भोले,
मेरे भोले,
दिल का पपीहा बोले बोले,
बोले बोले,
दया के सागर मेरे भोले,
तेरी नगरिया मन भा गई,
तेरी नगरिया मन भा गई।

बरसे बदरिया हौले हौले,
हौले हौले,
दर्शन को मन मेरा डोले,
मेरा डोले,
बरसे बदरिया हौले हौले,
हौले हौले,
दर्शन को मन मेरा डोले,
तेरी नगरिया मन भा गई,
तेरी नगरिया मन भा गई।


शिव की नगरिया मन्न भा गयी | Shiv Ki Nagariya Mann Bha Gayi With Lyrics |Anjali Jain, Shailendra Jain

बदरिया में बारिश की हल्की गुंजन वैसे ही उमड़ी लगती है जैसे दिल में दर्शन को लेकर उम्मीद धीरे‑धीरे हिलने लगती है। बाहर बरसती बूँदें और भीतर डोलता मन—दोनों एक ही धुन में झूम जाते हैं। वह नगरिया, वह शिव की डगर, वही रास्ता जिसने भक्त के ज़िन्दगी के उलझे हुए मोड़ों को बस यूँ ही साफ कर दिया हो। जब आँखें खुद‑ब‑खुद उसी दिशा की ओर खिंचती हैं, तो लगता है मानो पूरा आसमान भी उसी देश की तरफ झुक गया है, जहाँ शिव के दर्शन की बारिश हो रही है।

चरणों में ध्यान लगाने और गुण गाने की बात होते ही दिल को एक घर मिल जाता है जिसमें अब कोई बाहर का रास्ता नहीं, सिर्फ वही कंधा है जो अपने साथ उठाता है। नसीब की खिड़कियाँ खुलती हैं, न कोई भरम, न उलझन, बस एक माँ‑सा भाव जो दुख को रेज़ कर देता है—जैसे सारी झुकावटें एक कंधे पर आकर टिक जाती हैं और बाद में धीरे‑धीरे गायब हो जाती हैं। जो गिरे को उठाता है, भटके को रास्ता दिखाता है, बिगड़ी हुई राह को समेट लेता है, वह न सिर्फ धरती और अंबर का है, बल्कि दिल के छोटे‑से मंदिर में भी फैला हुआ है—वही पपीहा बोलता है, वही दया का सागर खुद‑ब‑खुद खुल जाता है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री भोले नाथ जी की।

Singers: Anjali Jain, Shailendra Jain
Music Director: Arun Shankar
Lyrics: Ishwar, "Dipak", Rakesh Dhama 

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