चालो म्हारी सुरता गगन मण्डल भजन
चालो म्हारी सुरता गगन मण्डल भजन
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
सोहनी शिखर में चमके बिजली,
गगन घटा झुक आई रे,
मधुर-मधुर धुन बोले पपैइयो रे,
बैरण नींद उड़ाई रे,
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
चित्त र चौक में मड़ियो हिण्डोलो रे,
हींड तीज सवाई रे,
पाँच-पचीस मील सारी सखियाँ,
सुन्दर शोभा पाई रे,
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
सुमता रो हार मेरे पीय जी पहनायो रे,
सुगन्ध भई नभ माहीं रे,
प्रेम-पुष्प म्हारो कबहूँ ना सूखै रे,
नित चौसर हरियाई रे,
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
ओहंग-सोहंग गा लाग्यो झकोरा रे,
झूलो चढ़्यो नभ माहीं रे,
मैं डरती मेरे प्रीतम ना पकड़्यो,
छोड़ूँ तो गिर जाई रे,
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
देवनाथ चतुर चौमासे गा रसिया,
म्हे बाँ स्यूँ गम पाई रे,
केवे राजा मान आनन्द में रेणो रे,
म्हारे तो सावण सदाईं रे,
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
सोहनी शिखर में चमके बिजली,
गगन घटा झुक आई रे,
मधुर-मधुर धुन बोले पपैइयो रे,
बैरण नींद उड़ाई रे,
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
चित्त र चौक में मड़ियो हिण्डोलो रे,
हींड तीज सवाई रे,
पाँच-पचीस मील सारी सखियाँ,
सुन्दर शोभा पाई रे,
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
सुमता रो हार मेरे पीय जी पहनायो रे,
सुगन्ध भई नभ माहीं रे,
प्रेम-पुष्प म्हारो कबहूँ ना सूखै रे,
नित चौसर हरियाई रे,
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
ओहंग-सोहंग गा लाग्यो झकोरा रे,
झूलो चढ़्यो नभ माहीं रे,
मैं डरती मेरे प्रीतम ना पकड़्यो,
छोड़ूँ तो गिर जाई रे,
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
देवनाथ चतुर चौमासे गा रसिया,
म्हे बाँ स्यूँ गम पाई रे,
केवे राजा मान आनन्द में रेणो रे,
म्हारे तो सावण सदाईं रे,
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
चालो म्हारी सुरता,
गगन मण्डल में,
रैन-दिवस लीव लाई रे।
चालो _म्हारी _सुरता_ गिगन_ मण्डल_में || Chalo Mahari Surta || समुन्द्र चेलासरी/ Samunder Chelasari
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Singer ---- Samundar surela Chelasari , post. Nyolkhi , Tah. Rawtsar , Dist. Hanumangarh, (Rajasthan)
हे देवनाथ चतुर, तुम चौमासे के रसिया हो जो सावण सदाईं बनाकर गम भुला देते हो। राजस्थान के कान्हा, तुम्हारी लीला से गगन घटा झूलती, पपीहा पुकारता, सखियां शोभा पातीं। प्रेम हार पहनाते हो, झकोरा गवाते हो। तुम्हारी महिमा अनुपम है, हे सुरता वाले, चरणों में शरण लेकर रैन दिवस लीव लाई करते हो।
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Author - Saroj Jangir
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