ऐह पीगां प्रेम दीयां पाईयाँ सतगुरु प्यारे भजन
ऐह पीगां प्रेम दीयां पाईयाँ सतगुरु प्यारे भजन
मैं नीवीं, ते मेरा सतगुर ऊँचा,
ते मैं, ऊँचियां दे नाल लाई ।
सदके जावां, एहना ऊँचियां तों,
जिन्हां, नीवियां नाल निभाई ॥)
बोल जैकारा, मेरे सतगुर देव महाराज की... जय ।
बोल साचे दरबार की... जय ।
एह पेंघां, प्रेम दियां, पाईयां, सतगुर पियारे ॥
करमां वाले, झूठन पेंघां ॥ बोल बोल जैकारे,
एह पेंघां, प्रेम दियां, पाईयां, सतगुर...
गुरु घर दी, इस पेंघ दी सुनिया,
महिमा बड़ी न्यारी, महिमा बड़ी न्यारी ।
बांह फड़ आप, बिठाऊंदा सतगुर,
सभ नूं वारो वारी, सभ नूं वारो वारी ॥
भेद भाव ना, देवे सभ नूं ॥ इक्को जेहे हुल्लारे,
एह पेंघां, प्रेम दियां, पाईयां, सतगुर...
ज्ञान ध्यान दी, पेंघ च जिसनूं,
बहिण दा मिल जाए मौका, बहिण दा मिल जाए मौका ।
बणी रहे गुरु कृपा उस ते,
जिस दे मन च भरोसा, जिस दे मन च भरोसा ॥
गुरु घर दे सेवक दे कारज ॥ सतगुर आप संवारें,
एह पेंघां, प्रेम दियां, पाईयां, सतगुर...
प्रभु प्रेम दियां, पेंघां झूठन,
शांत जेहे वडभागी, शांत जेहे वडभागी ।
शुभ करमां दा फल है मनवा,
राम नाम अनुरागी, राम नाम अनुरागी ॥
चिंता फिकर रहे ना कोई ॥ अंग संग तारनहारे,
एह पेंघां, प्रेम दियां, पाईयां, सतगुर...
ते मैं, ऊँचियां दे नाल लाई ।
सदके जावां, एहना ऊँचियां तों,
जिन्हां, नीवियां नाल निभाई ॥)
बोल जैकारा, मेरे सतगुर देव महाराज की... जय ।
बोल साचे दरबार की... जय ।
एह पेंघां, प्रेम दियां, पाईयां, सतगुर पियारे ॥
करमां वाले, झूठन पेंघां ॥ बोल बोल जैकारे,
एह पेंघां, प्रेम दियां, पाईयां, सतगुर...
गुरु घर दी, इस पेंघ दी सुनिया,
महिमा बड़ी न्यारी, महिमा बड़ी न्यारी ।
बांह फड़ आप, बिठाऊंदा सतगुर,
सभ नूं वारो वारी, सभ नूं वारो वारी ॥
भेद भाव ना, देवे सभ नूं ॥ इक्को जेहे हुल्लारे,
एह पेंघां, प्रेम दियां, पाईयां, सतगुर...
ज्ञान ध्यान दी, पेंघ च जिसनूं,
बहिण दा मिल जाए मौका, बहिण दा मिल जाए मौका ।
बणी रहे गुरु कृपा उस ते,
जिस दे मन च भरोसा, जिस दे मन च भरोसा ॥
गुरु घर दे सेवक दे कारज ॥ सतगुर आप संवारें,
एह पेंघां, प्रेम दियां, पाईयां, सतगुर...
प्रभु प्रेम दियां, पेंघां झूठन,
शांत जेहे वडभागी, शांत जेहे वडभागी ।
शुभ करमां दा फल है मनवा,
राम नाम अनुरागी, राम नाम अनुरागी ॥
चिंता फिकर रहे ना कोई ॥ अंग संग तारनहारे,
एह पेंघां, प्रेम दियां, पाईयां, सतगुर...
पीगां प्रेम दीयां पाईयाँ सतगुरु प्यारे @ Shri Anand Bhajan Mala ||SSDN||Shri Anandpur Bhajans||
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नीच को ऊँचा उठाने वाले सतगुरु महाराज जी की महिमा निराली है। प्रेम की पेंघ चढ़ाईये, झूठन वाली पेंघ जो करम वालों को मिलती है। गुरु घर में ये पेंघ सुनाई दे तो मन झूम उठता है। बाहें फड़ाकर बिठाते हैं सबको, भेदभाव न देकर एक समान प्रेम बरसाते। बहन को ज्ञान-ध्यान का मौका मिले, गुरु कृपा बनी रहे मन के भरोसे से। सेवकों के कारज खुद संवारते हैं, शांत आत्मा वाले वड़भागी बनते हैं। राम नाम के अनुरागी को शुभ फल मिलता है, चिंता-फिक्र दूर हो जाती। जैसे वो गरीब जो गुरु चरणों में प्रेम चढ़ाकर जीवन संवारा। ये प्रेम जीवन को जोड़ता है प्रभु से।
सतगुरु देव महाराज जी सच्चे दरबार में सबको जगह देते हैं। प्रभु प्रेम वाली पेंघ झूठन है, राम नाम जपने वाले इसका फल पाते। इकको हुल्लारे सबको बोलें, जैकारे गूँजें। गुरु घर की सेवा से मन शांत रहता है, अंग संग तारनहार बने रहते हैं। आप सभी पर इश्वर का आशीर्वाद बना रहे। जय श्री सतगुरु देव महाराज जी की।
सतगुरु देव महाराज जी सच्चे दरबार में सबको जगह देते हैं। प्रभु प्रेम वाली पेंघ झूठन है, राम नाम जपने वाले इसका फल पाते। इकको हुल्लारे सबको बोलें, जैकारे गूँजें। गुरु घर की सेवा से मन शांत रहता है, अंग संग तारनहार बने रहते हैं। आप सभी पर इश्वर का आशीर्वाद बना रहे। जय श्री सतगुरु देव महाराज जी की।
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