राती सोचदी गुरां दा नाम जपणां भजन
राती सोचदी गुरां दा नाम जपणां भजन
राती सोचदी गुरां दा नाम जपणां,
सवेरे उठी पुली हो जांदी।
जदौं देखदी अन्ना दियां बोरियां धन्ना,
दियां बोरियां उन्ना जो देखी भूली ओ,
जांदी राती सोचदी गुरां दा नाम जपणां,
हरि दा नाम जपणां,
सवेरे उठी पुली हो जांदी।
जदौं देखदी पुतां दियां जोड़ियां नूहां,
दियां जोड़ियां उन्ना जो देखी,
पुली हो जांदी राती,
सोचदी गुरां दा नाम जपणां,
हरि दा नाम जपणां,
सवेरे उठी पुली हो जांदी।
जदौं देखदी धीयां दियां जोड़ियां,
जवाईयां दियां जोड़ियां उन्ना जो,
देखी पुली हो जांदी राती सोचदी,
गुरां दा नाम जपणां हरि दा नाम,
जपणां सवेरे उठी पुली हो जिंदी।
सवेरे उठी पुली हो जांदी।
जदौं देखदी अन्ना दियां बोरियां धन्ना,
दियां बोरियां उन्ना जो देखी भूली ओ,
जांदी राती सोचदी गुरां दा नाम जपणां,
हरि दा नाम जपणां,
सवेरे उठी पुली हो जांदी।
जदौं देखदी पुतां दियां जोड़ियां नूहां,
दियां जोड़ियां उन्ना जो देखी,
पुली हो जांदी राती,
सोचदी गुरां दा नाम जपणां,
हरि दा नाम जपणां,
सवेरे उठी पुली हो जांदी।
जदौं देखदी धीयां दियां जोड़ियां,
जवाईयां दियां जोड़ियां उन्ना जो,
देखी पुली हो जांदी राती सोचदी,
गुरां दा नाम जपणां हरि दा नाम,
जपणां सवेरे उठी पुली हो जिंदी।
राती सोचदी गुरां दा नाम जपणां (Bhajan with lyrics) | SSDN bhajan 2023 | New Anandpur bhajan#satguru
आपको ये पोस्ट पसंद आ सकती हैंमानव मन जानता है कि प्रभु का नाम ही जीवन का सच्चा आधार है, परंतु संसार की मोह-माया उसे बार-बार भटका देती है। रात के शांत क्षणों में आत्मा भीतर से पुकारती है कि प्रभु का स्मरण ही बाकी है, वही शांति और मुक्ति का मार्ग है। लेकिन जैसे ही सुबह होती है और दृष्टि सांसारिक वस्तुओं पर जाती है, मन मोह के जाल में उलझ जाता है। अन्न के भंडार, संतान के जोड़-घटाव, रिश्तों और संसारिक मोह के दृश्य आते ही प्रभु का नाम स्मरण धुंधला हो जाता है और साधक भूल जाता है कि उसका ध्येय क्या था।
यही जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष है—सच्चाई का ज्ञान होते हुए भी मन संसारिक आकर्षणों से बच नहीं पाता। प्रभु ने नाम-स्मरण को मनुष्य का सबसे सरल और सुलभ साधन बनाया है, परंतु मोह इतना प्रबल है कि उसका अभ्यास निरंतर करना कठिन जान पड़ता है। यह भटकाव अंततः यही सिखाता है कि जिसे प्रभु को पाना है, उसे दृढ़ निश्चय और निरंतरता से साधना करनी होगी। जब तक ध्यान जगत के मोह से ऊपर नहीं उठेगा, तब तक प्रभु के नाम में डूबने का सुख अधूरा ही रहेगा। यही स्मरण साधक को प्रेरित करता है कि हर दिन नया प्रयास करे और धीरे-धीरे वह क्षण लाए जब सांसारिक आकर्षण जगाने पर भी नाम स्मरण स्थिर हो जाए।
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Author - Saroj Jangir
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