जग में बैरी कोई नहीं जो मन शीतल होय
जग में बैरी कोई नहीं जो मन शीतल होय हिंदी मीनिंग
यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोय।।
Jag Me Bairi Koi Nahi, Jo Man Sheetal Hoy,
Yah Aapa To Daal De, Daya Kare Sab Koy.
कबीर साहेब की वाणी है की इस जगत में कोई शत्रु नहीं है यदि मन से अहम्/अहंकार को छोड़ दिया जाय। मन के शीतल होने पर सभी व्यक्ति मित्र होते हैं। आशय है की मन से बैर भाव को छोड़ दो और अपने अहम् को त्याग करके तुम हरी के नाम का सुमिरण करो। इस दोहे में संत कबीर जी कहते हैं कि इस संसार में कोई भी हमारा दुश्मन नहीं है, अगर हमारा मन शुद्ध हो। मन का शुद्ध होना ही शीतल मन है। जब हमारा मन शुद्ध होता है, तो हम किसी के प्रति भी घृणा या द्वेष नहीं रखते। हम सभी के साथ प्रेम और दया से पेश आते हैं। इस दोहे के पहले चरण में संत कबीर जी कहते हैं कि इस संसार में कोई भी हमारा दुश्मन नहीं है। वे कहते हैं कि सभी लोग अच्छे हैं, लेकिन उनके अंदर बुराई के बीज भी होते हैं। अगर हम अपने मन को शुद्ध रखें, तो हम दूसरों की बुराइयों को देख पाएंगे।
मन की शीतलता ही वह अमृत है जो सारे बैर और द्वेष को धो देती है। जब मन से अहंकार का बोझ उतर जाता है, तो दुनिया में कोई शत्रु नहीं दिखता, हर कोई मित्र बन जाता है। जैसे कोई साधक प्रभु का नाम जपते हुए अपने मन को शुद्ध रखता है, वैसे ही वह हर जीव के प्रति दया और प्रेम से भर जाता है। यह सुंदर दोहा मन को यह सिखाता है कि अपने भीतर की घृणा और अहम को छोड़कर, प्रभु के प्रेम में डूब जाओ, क्योंकि यही शुद्ध मन संसार को प्रेम और शांति से देखने की नजर देता है।
आपको ये पोस्ट पसंद आ सकती हैं
आपको ये पोस्ट पसंद आ सकती हैं
|
Author - Saroj Jangir
दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं कबीर के दोहों को अर्थ सहित, कबीर भजन, आदि को सांझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें। |
