मैं आया तेरे द्वार मेरे खाटू वाले भजन

मैं आया तेरे द्वार मेरे खाटू वाले भजन


लगा के आस लगाए बैठा हूँ,
एक जमाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।

कभी पत्थर की अहल्या को आप तारें हो,
कभी भिलणी के झूठे बेर भी स्वीकारें हो,
मिले हनुमान को तुम रामनाम सुनाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।

कभी तुलसी के आप राम जी कहलाए हो,
कभी मीरा के लिए विष को भी पचाए हो,
मिले रसखान को ब्रज धूल लगाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।

कभी ग्वालों के आप सखा जी कहलाए हो,
कभी मैया के, कभी बाबा के मन भाए हो,
मिले ब्रजवासियों को गोवर्धन उठाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।

कभी मैंने सुना दुखियों का दुख मिटा के मिले,
कभी तो ये सुना रूठों को तुम मनाकर मिले,
मिलो इस दास को भी चरणों में बिठाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।

लगा के आस लगाए बैठा हूँ,
एक जमाने से,
मिलोगे कब मेरे भगवान,
किस बहाने से।



(तालीकीर्तन)मैं आया तेरे द्वार,मेरे खाटू वाले Mai aayaTere Dawar Mere Khatu WaleSunny Shyam Deewana

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साधक हारे हुए मन से खाटू वाले श्याम के द्वार पर पहुँचता है, करुणा की पुकार लगाता है कि जीवन की मझधार में अटकी नाव को वे ही खेवैया बनें। जब से उनकी नजर पड़ी, दिल बेचैन होकर बस उन्हीं को पुकारने लगा, नाते तोड़कर उनके पास आ गया और जीवन में बहार छा गई। हारे का सहारा बने सांवरे के प्रति गहरी श्रद्धा उमड़ती है, बस एक दृष्टि, एक उपकार की आशा में सारा संसार भूल जाता है।

खाटू वाले श्याम करुणा के सागर हैं, जो असहायों को थाम लेते हैं और भक्तों के सारे दुख हर लेते हैं। कमल पर विराजमान सांवरे का स्वरूप दया, शक्ति और अपार प्रेम से भरा है, उनकी एक कृपा दृष्टि से जीवन के सारे संकट टल जाते हैं। जो सच्चे मन से उनके द्वार पर आता है, वे उसे अपने आंचल में समेट लेते हैं, नया जीवन देते हैं और हर बाधा को सहज पार करा देते हैं।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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