तेरी दीवानी राधा रानी कब से निहारे थोर
तेरी दीवानी राधा रानी कब से निहारे थोर
तेरी दीवानी राधा रानी, कब से निहारे थोर,
जब देखो जाए कान्हा जी, सौतन बंसी की ओर...
सारा-सारा दिन तू तो, अधरों को ऐसे चूमे,
लिपट कमरिया से कान्हा के, हर पल संग में घूमे,
लाज नहीं आती क्या तुझको, सुन ओ बनवारिया?
तू मेरी सौतन बाँसुरिया, मेरी बैरन बाँसुरिया...
तूने मेरे मोहन पे, कैसा जादू डाला?
मेरा कन्हैया बन गया देखो, मुरली वाला...
एक तेरे कारण दूर हुआ है, मुझसे सांवरिया,
तू मेरी सौतन बाँसुरिया, मेरी बैरन बाँसुरिया...
सुन ओ मेरी प्यारी राधा, क्यों इतना घबराती है?
मेरी तो हर एक साँस तेरा ही गीत सुनाती है...
अधरों पे बेशक है, पर दिल में तू ही गुजरिया,
नहीं है सौतन बाँसुरिया, न है बैरन बाँसुरिया...
जब देखो जाए कान्हा जी, सौतन बंसी की ओर...
सारा-सारा दिन तू तो, अधरों को ऐसे चूमे,
लिपट कमरिया से कान्हा के, हर पल संग में घूमे,
लाज नहीं आती क्या तुझको, सुन ओ बनवारिया?
तू मेरी सौतन बाँसुरिया, मेरी बैरन बाँसुरिया...
तूने मेरे मोहन पे, कैसा जादू डाला?
मेरा कन्हैया बन गया देखो, मुरली वाला...
एक तेरे कारण दूर हुआ है, मुझसे सांवरिया,
तू मेरी सौतन बाँसुरिया, मेरी बैरन बाँसुरिया...
सुन ओ मेरी प्यारी राधा, क्यों इतना घबराती है?
मेरी तो हर एक साँस तेरा ही गीत सुनाती है...
अधरों पे बेशक है, पर दिल में तू ही गुजरिया,
नहीं है सौतन बाँसुरिया, न है बैरन बाँसुरिया...
Teri Diwani Radha Rani | Official Video 4K | Kanchhan Srivas & Sundeep Gosswami | Radha Krishna Song
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राधा के मन में अपने कृष्ण के लिए गहरा प्रेम और अपनापन है, लेकिन उसी प्रेम में एक मीठी सी शिकायत भी छुपी है। कृष्ण की बांसुरी को देखकर मन में ईर्ष्या और तकरार का भाव जाग उठता है, क्योंकि कृष्ण का मन, उनकी मुस्कान और उनका स्नेह बार-बार बांसुरी की ओर आकर्षित हो जाता है। बांसुरी कृष्ण के अधरों से चिपकी रहती है, उनकी कमरिया से लिपटी रहती है, और हर पल उनके साथ घूमती रहती है। यही देखकर राधा के मन में यह भाव आता है कि बांसुरी उनकी सौतन और बैरन बन गई है, जिसने कृष्ण का सारा ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
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श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
राधा के मन में अपने कृष्ण के लिए गहरा प्रेम और अपनापन है, लेकिन उसी प्रेम में एक मीठी सी शिकायत भी छुपी है। कृष्ण की बांसुरी को देखकर मन में ईर्ष्या और तकरार का भाव जाग उठता है, क्योंकि कृष्ण का मन, उनकी मुस्कान और उनका स्नेह बार-बार बांसुरी की ओर आकर्षित हो जाता है। बांसुरी कृष्ण के अधरों से चिपकी रहती है, उनकी कमरिया से लिपटी रहती है, और हर पल उनके साथ घूमती रहती है। यही देखकर राधा के मन में यह भाव आता है कि बांसुरी उनकी सौतन और बैरन बन गई है, जिसने कृष्ण का सारा ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
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Author - Saroj Jangir
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