उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले
उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसीवाले।
ओ बंसीवाले, ओ मुरलीवाले।
औरों की तूने मटकी उठाई,
मटकी उठाई, तूने मटकी उठाई।
हमारी काहे पटकी, ओ बंसीवाले।
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसीवाले।
औरों की तूने गैया चराई,
गैया चराई, तूने गैया चराई।
मेरी काहे भटकी, ओ बंसीवाले।
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसीवाले।
औरों का तूने माखन खाया,
माखन खाया, तूने माखन खाया।
मेरी मटकी छिके लटकी, ओ बंसीवाले।
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसीवाले।
औरों को तूने चुनर ओढ़ाई,
चुनर ओढ़ाई, तूने चुनर ओढ़ाई।
मेरी चुनरी झाड़ी अटकी, ओ बंसीवाले।
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसीवाले।
औरों की नैया पार लगाई,
पार लगाई, तूने पार लगाई।
मेरी क्यों भंवर अटकी, ओ बंसीवाले।
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसीवाले।
ओ बंसीवाले, ओ मुरलीवाले।
औरों की तूने मटकी उठाई,
मटकी उठाई, तूने मटकी उठाई।
हमारी काहे पटकी, ओ बंसीवाले।
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसीवाले।
औरों की तूने गैया चराई,
गैया चराई, तूने गैया चराई।
मेरी काहे भटकी, ओ बंसीवाले।
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसीवाले।
औरों का तूने माखन खाया,
माखन खाया, तूने माखन खाया।
मेरी मटकी छिके लटकी, ओ बंसीवाले।
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसीवाले।
औरों को तूने चुनर ओढ़ाई,
चुनर ओढ़ाई, तूने चुनर ओढ़ाई।
मेरी चुनरी झाड़ी अटकी, ओ बंसीवाले।
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसीवाले।
औरों की नैया पार लगाई,
पार लगाई, तूने पार लगाई।
मेरी क्यों भंवर अटकी, ओ बंसीवाले।
उठा दो मेरी मटकी, ओ बंसीवाले।
कृष्ण भजन | उठा दो मेरी मटकी ओ बंसी वाले | Utha Do Meri Matki | Radha Krishna Bhajan | Kajal Malik
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Title ▹Utha Do Meri Matki O Bansi Wale
Artist ▹ Sonia
Singer ▹ Kajal Malik
Music ▹ Pardeep Panchal
Lyrics & Composer ▹ Traditional
Editing ▹ Max Ranga
Cameraman ▹ Gulshan Bawa
जैसे तुमने सबकी मटकी उठाई, गैया चराई, माखन खाया, चुनर ओढ़ाई और नैया पार लगाई, वैसे ही मेरी भी मटकी उठा दो, मेरी भटकी हुई गैया को सही राह दिखा दो, मेरी मटकी जो छींके पर लटकी है उसे भी उतार दो, मेरी चुनरी जो झाड़ी में अटकी है उसे भी निकाल दो, और मेरी नैया जो भंवर में फँसी है उसे भी पार लगा दो। इसमें भक्ति, अपनापन, हल्की सी शिकायत और कृष्ण से मिलने की गहरी चाहत झलकती है, जहाँ भक्त अपने जीवन की छोटी-बड़ी परेशानियों को भी कृष्ण की लीलाओं से जोड़कर, उनसे स्नेह और कृपा की उम्मीद करता है।
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बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Title ▹Utha Do Meri Matki O Bansi Wale
Artist ▹ Sonia
Singer ▹ Kajal Malik
Music ▹ Pardeep Panchal
Lyrics & Composer ▹ Traditional
Editing ▹ Max Ranga
Cameraman ▹ Gulshan Bawa
जैसे तुमने सबकी मटकी उठाई, गैया चराई, माखन खाया, चुनर ओढ़ाई और नैया पार लगाई, वैसे ही मेरी भी मटकी उठा दो, मेरी भटकी हुई गैया को सही राह दिखा दो, मेरी मटकी जो छींके पर लटकी है उसे भी उतार दो, मेरी चुनरी जो झाड़ी में अटकी है उसे भी निकाल दो, और मेरी नैया जो भंवर में फँसी है उसे भी पार लगा दो। इसमें भक्ति, अपनापन, हल्की सी शिकायत और कृष्ण से मिलने की गहरी चाहत झलकती है, जहाँ भक्त अपने जीवन की छोटी-बड़ी परेशानियों को भी कृष्ण की लीलाओं से जोड़कर, उनसे स्नेह और कृपा की उम्मीद करता है।
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Author - Saroj Jangir
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