भोलेनाथ मेरे महाकाल मेरे भजन

भोलेनाथ मेरे महाकाल मेरे भजन

भोलेनाथ मेरे महाकाल मेरे भजन

भोलेनाथ मेरे, भोलेनाथ मेरे,
महाकाल मेरे, महाकाल मेरे...
भोलेनाथ मेरे, भोलेनाथ मेरे,
महाकाल मेरे, महाकाल मेरे...

सावन का महीना आया,
भोले की मस्ती में छाया,
जटा से जिसके निकली है गंगा,
भोले की मस्ती में...
डम-डम डम-डम डमरू बाजे,
भोले के नाम से निकली है दुनिया सारी,
सारे कष्टों के पल में हरे...

भोले तेरे शौक निराले,
कहीं चिलम, कहीं विष के प्याले,
क्या दुनिया में तेरे खेल!
मेरे रोम-रोम में शिव शंभु डमरू वाले...

भोलेनाथ मेरे, नाथ मेरे...
भोलेनाथ मेरे, नाथ मेरे...
भोलेनाथ मेरे, नाथ मेरे...
भोलेनाथ मेरे, नाथ मेरे...

बाबा महाकाल के भक्त हैं,
हर हाल में मस्त हैं,
ज़िंदगी एक धुआं है,
हम चिलम में मस्त हैं...

आंख मीचकर खींच ले,
भांग का प्याला फूंक ले,
भोले की मस्ती में थोड़ा सा डूब ले...
भोले के हम भक्त हैं,
तभी तो हम मस्त हैं,
महाकाल के नारे में,
थोड़ा सा हम व्यस्त हैं...

चल रहा हूँ धूप में,
तो महाकाल की छाया,
शरण है तेरी सच्ची,
बाकी सब मोह माया...

इसके बिना ना कोई ज्ञान,
सुबह हो या मेरा श्याम,
बस महाकाल पर ध्यान...
अधूरी हर शिक्षा, असुर ब्रह्मांड,
त्रिलोक के हैं स्वामी,
जय महाकाल! जय महाकाल!


STYLISH ASH - Bholenath (Official Audio)

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Rapper - Stylish Ash
Lyrics - Stylish Ash
 
  • चिलम – तंबाकू या अन्य पदार्थ पीने का मिट्टी या धातु का पाइप (Clay or Metal Pipe for Smoking)
  • डमरू – एक छोटा, दो तरफा ढोलकनुमा वाद्ययंत्र, जो भगवान शिव के हाथ में रहता है (Small Two-Headed Drum Associated with Shiva)
  • शौक निराले – अनोखी रुचियाँ या विशेषताएँ (Unique Interests or Habits)
  • त्रिलोक – तीनों लोक (स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल) (Three Worlds: Heaven, Earth, and Netherworld)
  • मोह माया – सांसारिक भौतिक सुखों का भ्रम (Illusion of Materialistic World)
 ♫Song Credits♫
♫ Rapper - Stylish Ash
♫ Lyrics - Stylish Ash 
♫ Music - Stylish Ash 
♫ Mixing & Mastering - Stylish Ash
 
शिव के प्रति यह भक्ति का भाव भक्त के हृदय को एक ऐसी मस्ती और उल्लास से भर देता है, जो सांसारिक बंधनों को तोड़कर उसे प्रभु की शरण में ले जाता है। शिव का वह निराला और अलौकिक स्वरूप, जो गंगा को जटाओं में धारण करता है और डमरू की ध्वनि से सृष्टि को संनादित करता है, भक्त को यह सिखाता है कि जीवन की सारी चिंताएँ और कष्ट प्रभु की भक्ति में डूबकर नष्ट हो जाते हैं। यह भाव कि शिव की मस्ती में लीन होकर भक्त हर हाल में मस्त रहता है, यह दर्शाता है कि प्रभु की कृपा ही वह छाया है, जो जीवन की हर तपन में शीतलता प्रदान करती है। शिव की यह महिमा भक्त को प्रेरित करती है कि वह सांसारिक मोह-माया को त्यागकर केवल प्रभु के नाम और उनकी भक्ति में लीन रहे, ताकि जीवन का हर पल उनकी कृपा से आनंदमय और अर्थपूर्ण हो।
 
भगवान शिव को भोलेनाथ है क्योंकि वे अत्यंत सरल, दयालु और सहजता से प्रसन्न होने वाले देवता हैं। वे अपने भक्तों की थोड़ी सी भक्ति से ही संतुष्ट हो जाते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। शिव को 'महादेव' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'देवताओं के भी देव', क्योंकि वे सृष्टि के संहार, पुनर्निर्माण और संतुलन का कार्य करते हैं। उनका तीसरा नेत्र अज्ञान का नाश करने का प्रतीक है, और वे काल से भी परे हैं, इसीलिए उन्हें 'महाकाल' भी कहा जाता है। उन्होंने समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को पीकर सृष्टि की रक्षा की, जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए।  
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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