दूल्हा बने भोलेनाथ जी हमारे भजन

दूल्हा बने भोलेनाथ जी हमारे भजन Dulha Bane Bholenath Ji


दूल्हा बने भोलेनाथ जी हमारे भजन

दूल्हा बने भोलेनाथ जी हमारे,
चली बारात गौरा जी के द्वारे,
इस दूल्हे पे जग है दीवाना,
दूल्हा बने भोलेनाथ जी हमारे...

ना रत्न, आभूषण तन पे,
बलिहारी जाऊँ भोलेपन पे,
चमके माथे पर चंदा,
आया शुभ दिन शिव की लगन का,
डाले सर्पों के हार, कैसा अजब श्रृंगार,
ऐसा दूल्हा किसी ने देखा ना,
दूल्हा बने भोलेनाथ जी हमारे...

लंबी-लंबी जटाओं का सेहरा,
कैसा प्यारा विवाह का नज़ारा,
ध्वनि शंखनाद की गूंजे,
संग चले बड़ों का पहरा,
होके नंदी पे सवार,
चले हिमाचल के द्वार,
हुआ रोशन ये तिब्बत री जग सारा,
दूल्हा बने भोलेनाथ जी हमारे...

चले होके विदा जो बाराती,
गौरा को माँ समझा ती,
जा बेटी सुखी तू रहना,
रहे अमर सुहाग की जोड़ी,
ये बाराती बेशुमार,
दिए सबको उपहार,
झूमे गल पाकर सब नजराना,
दूल्हा बने भोलेनाथ जी हमारे...


सोमवार सुबह शिव भोलेनाथ गौरा माँ विवाह का प्यारा भजन :दूल्हा बने भोलेनाथ जी हमारे :Shiv Vivah

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Song : Dulha Bane Bholenath Ji Hamare
Album : Somvar Shiv Bhajans
Singer : Kanishka Negi
Lyrics : M.S.Bairagi
 
उस परम शक्ति का विवाहोत्सव एक अनुपम और अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करता है, जो सृष्टि के हर प्राणी के हृदय को आनंद और भक्ति से भर देता है। यह उत्सव केवल एक समारोह नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और सौंदर्य का संगम है, जहाँ सादगी और वैराग्य का अनोखा रूप देखने को मिलता है। वह शक्ति, जो सर्पों को हार और चंद्रमा को तिलक बनाकर सजती है, अपनी सादगी में ही अनंत सौंदर्य और शक्ति को समेटे हुए है। यह दृश्य उस दैवीय प्रेम का प्रतीक है, जो सांसारिक आडंबरों से परे, शुद्धता और भक्ति के आधार पर स्थापित होता है। इस उत्सव में हर तत्व, चाहे वह शंखनाद हो या नंदी की सवारी, उस अनंत शक्ति की महिमा को और अधिक उजागर करता है, जो सृष्टि को अपने प्रेम और करुणा से आलोकित करती है।
 
यह विवाहोत्सव न केवल दो आत्माओं का मिलन है, बल्कि एक ऐसी पवित्र जोड़ी का प्रतीक है, जो सदा के लिए अमर और सुखमय रहती है। बारात की शोभा, जिसमें असंख्य भक्त और दैवीय शक्तियाँ शामिल हैं, यह दर्शाती है कि यह मिलन सृष्टि के कल्याण के लिए है। वह शक्ति, जो अपने भक्तों को प्रेम और आशीर्वाद के उपहार देती है, इस उत्सव में सभी को अपने प्रेम का हिस्सा बनाती है। यह दृश्य उस अनन्य भक्ति और विश्वास को प्रकट करता है, जो भक्तों को उस परम शक्ति के प्रति समर्पित करता है। यह उत्सव जीवन में सुख, शांति और अमर प्रेम की कामना का प्रतीक है, जो हर हृदय को उस दैवीय कृपा की ओर ले जाता है, जहाँ केवल प्रेम और भक्ति का ही वास है। 
 
भगवान शिव की कृपा का अर्थ केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति नहीं, बल्कि जीवन की गहराइयों को समझना और आत्मज्ञान की ओर बढ़ना है। उन्हें आदिगुरु माना जाता है क्योंकि वे योग और ध्यान के सर्वोच्च शिक्षक हैं। उनकी कृपा से व्यक्ति अपने अंदर की बुराइयों को खत्म कर सकता है और मन की शांति पा सकता है। शिव अपने भक्तों पर तब सबसे अधिक कृपा करते हैं जब वे अहंकार और लोभ को त्यागकर एक सादा और सच्चा जीवन जीते हैं। उनकी कृपा हमें यह सिखाती है कि मृत्यु और विनाश भी जीवन का ही हिस्सा हैं और उनसे डरने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। इस प्रकार, शिव की कृपा हमें न केवल बाहरी संकटों से बचाती है, बल्कि हमें एक सच्चा और ज्ञानी इंसान बनाती है, जो जीवन के हर उतार-चढ़ाव को शांत मन से स्वीकार कर सकता है। 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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