झांजर कीन्हे छुपाई आज मेरे मोहन दी
झांजर कीन्हे छुपाई आज मेरे मोहन दी
चांदी दी मैं झांझर लियाई, सोने दी पार्ट चढ़ाई,
मुहूर्त देखकर मैं श्याम दे पैरी पाई।
श्याम मेरा नचदा फिरे, जय हो,
श्याम मेरा खुश हो फिरे, जय हो,
झांझर कीन्हे...
रिरड़ा रिरड़ा श्याम मेरा जद वेहड़े दे विच आया,
पैरी झांझर ना देख के दिल मेरा घबराया।
श्याम मेरा रौंदा जावे, जय हो,
श्याम नू चुप कराओ, जय हो,
श्याम मेरा चुप न होवे, जय हो,
झांझर कीन्हे...
दौड़ी दौड़ी एक सहेली यशोदा दे कोल आई,
झोली विचों कड के झांझर शाम दे पैरी पाई।
झांझर लब लियाईं, जय हो,
श्याम मेरा नचदा फिरे, जय हो,
श्याम मेरा खुश हो फिरे, जय हो...
मुहूर्त देखकर मैं श्याम दे पैरी पाई।
श्याम मेरा नचदा फिरे, जय हो,
श्याम मेरा खुश हो फिरे, जय हो,
झांझर कीन्हे...
रिरड़ा रिरड़ा श्याम मेरा जद वेहड़े दे विच आया,
पैरी झांझर ना देख के दिल मेरा घबराया।
श्याम मेरा रौंदा जावे, जय हो,
श्याम नू चुप कराओ, जय हो,
श्याम मेरा चुप न होवे, जय हो,
झांझर कीन्हे...
दौड़ी दौड़ी एक सहेली यशोदा दे कोल आई,
झोली विचों कड के झांझर शाम दे पैरी पाई।
झांझर लब लियाईं, जय हो,
श्याम मेरा नचदा फिरे, जय हो,
श्याम मेरा खुश हो फिरे, जय हो...
झांझर किन्हें छुपाई मेरे मोहन दी with lyrics कीर्तन में रौनक वाला भजन@achieversbhaktiras
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यह प्यारा और भावपूर्ण गीत बाल-कृष्ण की नटखट लीलाओं और उनकी माँ यशोदा के स्नेह को दर्शाता है। इसमें कृष्ण की झांझर (पायल) के गुम हो जाने और उसे ढूँढने की चंचल कथा है। गीत में भाव है कि— आज मेरे मोहन (कृष्ण) की झांझर किसी ने छुपा दी है। मैंने चाँदी की झांझर लाकर उसमें सोने की परत चढ़ाई थी और शुभ मुहूर्त देखकर अपने श्याम के पैरों में पहनाई थी। जब श्याम मेरे आँगन में नाचते-झूमते थे, तो उनकी झांझर की आवाज़ से घर गूँज उठता था। लेकिन आज जब उनके पाँव में झांझर नहीं दिखी, तो मेरा दिल घबरा गया और श्याम भी रोने लगे।
फिर एक सखी दौड़ती हुई यशोदा मैया के पास गई, और अपनी झोली से झांझर निकालकर श्याम के पैरों में पहना दी। झांझर मिल गई, श्याम फिर से नाचने लगे और घर में खुशियाँ लौट आईं।
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सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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