जब होवे सच्चा प्यार क्यों ना मिले कन्हैया भजन

जब होवे सच्चा प्यार क्यों ना मिले कन्हैया भजन


जब होवे सच्चा प्यार
कौन कहता है दीदार नहीं होता,
आदमी खुद ही तलबगार नहीं होता।
उनसे मिलना है तो पहले प्रहलाद बनो,
वरना यूँ ही नरसिंह का अवतार नहीं होता।

जब होवे सच्चा प्यार, क्यों ना मिले कन्हैया,
क्यों ना मिले कन्हैया, क्यों ना मिले कन्हैया।
जब मिले जय हो, तार से तार,
क्यों ना मिले कन्हैया।
जब होवे सच्चा प्यार, क्यों ना मिले कन्हैया।

चंचल मन को तू समझा ले,
हरि चरणों में प्रीत लगा ले।
और मन से जय हो, तज अहंकार,
क्यों ना मिले कन्हैया।
जब होवे सच्चा प्यार, क्यों ना मिले कन्हैया।

वन में बैठी शबरी माई,
राम नाम की लगन लगाई।
किए दर्शन जय हो, अवध कुमार,
क्यों ना मिले कन्हैया।
जब होवे सच्चा प्यार, क्यों ना मिले कन्हैया।

पिता ने जब प्रहलाद सताया,
अपने प्रभु का ध्यान लगाया।
तब नरसिंह जय हो, लिया अवतार,
क्यों ना मिले कन्हैया।
जब होवे सच्चा प्यार, क्यों ना मिले कन्हैया।

दुर्योधन ने जाल बिछाया,
अर्जुन शरण, कृष्ण के आए।
बने सारथी जय हो, कृष्ण मुरार,
क्यों ना मिले कन्हैया।
जब होवे सच्चा प्यार, क्यों ना मिले कन्हैया।

जो तू भजन करे दिन-रात,
श्याम सुंदर बन जाए साथी।
तू शरण तो जय हो, आ एक बार,
क्यों ना मिले कन्हैया।
जब होवे सच्चा प्यार, क्यों ना मिले कन्हैया।


जब होवे सच्चा प्यार क्यों न मिले कन्हैया | 1.3.2022 | श्री गोकर्ण तीर्थ रोहतक | ‪@VrajBhav‬

ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
 

पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।


Voice: बाबा श्री चित्र विचित्र जी महाराज
Video Name: जब होवे सच्चा प्यार क्यों न मिले कन्हैया 
 
सच्चा प्यार दिल से निकलता है, जब वो गहरा होता है तो भगवान खुद मिलने आ जाते हैं। जैसे प्रह्लाद ने बचपन से ही विष्णु जी का नाम जप लिया, पिता की सारी सताइश झेली, लेकिन मन नहीं डगमगाया। तब प्रभु ने नरसिंह रूप धरकर उसकी रक्षा की, क्रोध को भी करुणा में बदल दिया। शबरी माई ने जंगल में सालों इंतजार किया, रोज ताजे बेर चुनकर रखे, झूठे-खोटे का भेद मिटाकर सिर्फ प्रेम से भेंट की। प्रभु राम जी ने उसके आश्रम में पग रखे और बिना किसी ऊंच-नीच के उसे अपना लिया। अर्जुन जब युद्ध के मैदान में हताश होकर शरण में आए, तो कृष्ण जी सारथी बनकर साथ खड़े हो गए, गीता का उपदेश दिया और जीत दिलाई।

मन को चंचल होने से रोकना पड़ता है, अहंकार को छोड़ना पड़ता है। जब भजन दिन-रात चलता रहता है, श्याम सुंदर खुद साथी बन जाते हैं। तलब दिल की होनी चाहिए, जैसे कोई प्यासा पानी की तलाश में लगे रहता है। प्रेम इतना सच्चा हो जाए कि हर सांस में उनका नाम बस जाए, तो मिलन की घड़ी आ ही जाती है। हर मुश्किल पार हो जाती है, जीवन में शांति छा जाती है। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। 

Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर भजनों का संग्रह । इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें

Next Post Previous Post