तुम सुनो श्री भगवान लगाकर ध्यान भूल मत जाना

तुम सुनो श्री भगवान लगाकर ध्यान भूल मत जाना


तुम सुनो श्रीभगवान, 
लगाकर ध्यान, भूल मत जाना,
कि तुम कलयुग में आना।

मेरा गोकुल जैसा गाँव नहीं है,
यहाँ दूध-दही का नाम नहीं है,
यहाँ मिले मोल का दूध, 
बनाऊँ उसकी खीर, खीर खा जाना,
कि तुम कलयुग में आना।
तुम सुनो श्रीभगवान, 
लगाकर ध्यान, भूल मत जाना...

मेरा मथुरा जैसा गाँव नहीं है,
यहाँ देसी घी का नाम नहीं है,
यहाँ मिले रिफाइंड तेल, 
बनाऊँ भोग, भोग खा जाना,
कि तुम कलयुग में आना।
तुम सुनो श्रीभगवान, 
लगाकर ध्यान, भूल मत जाना...

मेरा बरसाने जैसा गाँव नहीं है,
यहाँ राधा जैसी नार नहीं है,
यहाँ तरह-तरह की नार, 
हाँ जी हाँ नार, भूल मत जाना,
कि तुम कलयुग में आना।
तुम सुनो श्रीभगवान, 
लगाकर ध्यान, भूल मत जाना...

मैं अर्जुन जैसा भक्त नहीं हूँ,
मुझे गीता का कोई ज्ञान नहीं है,
यहाँ तरह-तरह के लोग, 
बनाते बात, भूल मत जाना,
कि तुम कलयुग में आना।
तुम सुनो श्रीभगवान, 
लगाकर ध्यान, भूल मत जाना...


तुम सुनो श्री भगवान, लगाकर ध्यान भूल मत जाना | Tum Suno Shri Bhagwan | Kajal Malik (With Lyrics)

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Title ▹Tum Suno Shree Bhagwan Lagakar Dhyan Bhool Mat Jana
Artist ▹ Pallavi Narang
Singer ▹ Kajal Malik
Music ▹ Pardeep Panchal
Lyrics & Composer ▹ Traditional
Editing ▹ Utsav Sehgal

इस भजन में बाल स्वरूप श्रीकृष्ण की मासूमियत, कोमलता और उनकी बाल लीलाओं की सरल छवि को अत्यंत स्नेह और ममता से प्रस्तुत किया गया है। बालकृष्ण के छोटे-छोटे अंगों का वर्णन करते हुए उनके प्रति गहरा वात्सल्य भाव प्रकट होता है। उनका माथा, गला, हाथ, पांव, मुख—सभी अंग छोटे और नन्हें हैं, जिनकी देखभाल और साज-सज्जा में विशेष प्रेम झलकता है। मुकुट, हार, मुरली, पायल, पीताम्बर और माखन—इन सब वस्तुओं के माध्यम से बालकृष्ण की बाल सुलभ इच्छाओं और सौंदर्य को सजाया गया है। कृष्ण को केवल भगवान नहीं, बल्कि एक नन्हें बालक के रूप में देखा गया है, जिसे हर समय स्नेह, सुरक्षा और देखभाल की आवश्यकता है। यह भाव मन में वात्सल्य, करुणा और प्रेम की तरंगें उत्पन्न करता है। बालकृष्ण की भोली मुस्कान, उनकी शरारतें और उनकी मासूमियत को निहारते हुए मन में यह भावना जागती है कि उन्हें हर प्रकार से स्नेह और संरक्षण मिले।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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