मनमोहन दी बन के दीवानी
मनमोहन दी बन के दीवानी
मनमोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मनमोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
ओहदे प्रेम विच हुई मस्तानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
हो गई मैं प्रीतम दी कमली,
लोग की मैं नू अखन पगली,
हो गई मैं प्रीतम दी कमली,
लोग की मैं नू अखन पगली,
जदो देखी मैं सूरत नूरानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
मनमोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मनमोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
ओ दे प्रेम विच हुई मस्तानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
जग विच मेनू कोई ना जचदा,
हर वेले करा श्याम दा सजदा,
जग विच मेनू कोई ना जचदा,
हर वेले करा श्याम दा सजदा,
सारी दुनिया तो हुई मस्तानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
मनमोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
ओ दे प्रेम विच हुई मस्तानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
छड्ड दीती सब रिश्तेदारी,
चित्र विचित्र दे बांके बिहारी,
ओहदे नाल मेरी प्रीत पुरानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
मनमोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मन मोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
ओ दे प्रेम विच हुई मस्तानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
मैं छम छम नचदी फिरां,
मनमोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
ओहदे प्रेम विच हुई मस्तानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
हो गई मैं प्रीतम दी कमली,
लोग की मैं नू अखन पगली,
हो गई मैं प्रीतम दी कमली,
लोग की मैं नू अखन पगली,
जदो देखी मैं सूरत नूरानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
मनमोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मनमोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
ओ दे प्रेम विच हुई मस्तानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
जग विच मेनू कोई ना जचदा,
हर वेले करा श्याम दा सजदा,
जग विच मेनू कोई ना जचदा,
हर वेले करा श्याम दा सजदा,
सारी दुनिया तो हुई मस्तानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
मनमोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
ओ दे प्रेम विच हुई मस्तानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
छड्ड दीती सब रिश्तेदारी,
चित्र विचित्र दे बांके बिहारी,
ओहदे नाल मेरी प्रीत पुरानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
मनमोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मन मोहन दी बन के दीवानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
ओ दे प्रेम विच हुई मस्तानी,
मैं छम छम नचदी फिरां,
मैं छम छम नचदी फिरां……
झूमकर नाचने वाला भजन - मन मोहन की बन के दीवानी मैं छम-छम नचदी फिरा | दिल्ली | @VrajBhav
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Author - Saroj Jangir
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