हां पर्वत ते उत्पन्न हुई मैं पार्वती है नाम मेरा
हां पर्वत ते उत्पन्न हुई मैं पार्वती है नाम मेरा
हां पर्वत ते उत्पन्न हुई मैं,
पार्वती है नाम मेरा,
तू कैलाश का राजा है,
अर पहाड़ां के में गाम तेरा,
यो रुद्र रूप क्यों बना लिया,
के मैं डर जाऊं तेरे ते,
मैं ब्याह करवाऊं तेरे ते,
मैं ब्याह करवाऊं तेरे ते।
मैं ब्याह करवाऊं तेरे ते,
ओ शिव लेहरी बस तेरे ते,
तू सोलह बरस मैं अस्सी बरस का,
तेरा मेरा मेल नहीं,
ब्याह करना एक जिम्मेवारी से,
गुड्डे-गुड़िया का खेल नहीं,
सुख भोगले जा के महलां के,
ऊरे हो जावेगी मार तेरी।
कोई जा के कंवर राजा का ढूंढ,
पड़े जंगल में ना पार तेरी,
कोई जा के कुमार राजा का ढूंढ,
पड़े जंगल में ना पार तेरी।
हे भोलेनाथ मेरा थाम हाथ,
माने तेरे सा ही वर मांगा,
के करना महल अटारी का,
जित तू रहवे वो दर मांगा।
जैसा वर तने चाहिए से,
वैसा कोई मेरा ढंग नहीं,
भूतां के गैलां यारी से,
इंसान रूप का संग नहीं।
तने पांके सपने लेके आई,
करी पूजा बेशुमार तेरी,
कोई जा के कंवर राजा का ढूंढ,
पड़े जंगल में ना पार तेरी।
हे सीध योगी तने पाण तईं,
मैं लाख जनम भी ले लूंगी,
तेरे प्रेम की दरिया अंदर,
हंसते-हंसते बह लूंगी।
हां उदासीन मैं पराचीन,
मैं निर्गुण नील दिगंबर हूं,
सांपां के आभूषण हैं,
मैं ज़हर का एक समुंदर हूं।
तू मन ही मन में जीत लिया,
के करवावेगा हार मेरी,
कोई जा के कंवर राजा का ढूंढ,
पड़े जंगल में ना पार तेरी,
कोई जा के कुमार राजा का ढूंढ,
पड़े जंगल में ना पार तेरी।
हिमाचल की है राजकुमारी,
यहां बन जावेगी दासी तू,
संपूर्ण है माने ज्ञान तेरा,
शिव अजर अमर अविनाशी तू।
भूतां के दर्शन होने जब,
देखे बारात मंडेरे ते,
मैं ब्याह करवाऊं तेरे ते,
ओ शिव लेहरी बस तेरे ते।
पार्वती है नाम मेरा,
तू कैलाश का राजा है,
अर पहाड़ां के में गाम तेरा,
यो रुद्र रूप क्यों बना लिया,
के मैं डर जाऊं तेरे ते,
मैं ब्याह करवाऊं तेरे ते,
मैं ब्याह करवाऊं तेरे ते।
मैं ब्याह करवाऊं तेरे ते,
ओ शिव लेहरी बस तेरे ते,
तू सोलह बरस मैं अस्सी बरस का,
तेरा मेरा मेल नहीं,
ब्याह करना एक जिम्मेवारी से,
गुड्डे-गुड़िया का खेल नहीं,
सुख भोगले जा के महलां के,
ऊरे हो जावेगी मार तेरी।
कोई जा के कंवर राजा का ढूंढ,
पड़े जंगल में ना पार तेरी,
कोई जा के कुमार राजा का ढूंढ,
पड़े जंगल में ना पार तेरी।
हे भोलेनाथ मेरा थाम हाथ,
माने तेरे सा ही वर मांगा,
के करना महल अटारी का,
जित तू रहवे वो दर मांगा।
जैसा वर तने चाहिए से,
वैसा कोई मेरा ढंग नहीं,
भूतां के गैलां यारी से,
इंसान रूप का संग नहीं।
तने पांके सपने लेके आई,
करी पूजा बेशुमार तेरी,
कोई जा के कंवर राजा का ढूंढ,
पड़े जंगल में ना पार तेरी।
हे सीध योगी तने पाण तईं,
मैं लाख जनम भी ले लूंगी,
तेरे प्रेम की दरिया अंदर,
हंसते-हंसते बह लूंगी।
हां उदासीन मैं पराचीन,
मैं निर्गुण नील दिगंबर हूं,
सांपां के आभूषण हैं,
मैं ज़हर का एक समुंदर हूं।
तू मन ही मन में जीत लिया,
के करवावेगा हार मेरी,
कोई जा के कंवर राजा का ढूंढ,
पड़े जंगल में ना पार तेरी,
कोई जा के कुमार राजा का ढूंढ,
पड़े जंगल में ना पार तेरी।
हिमाचल की है राजकुमारी,
यहां बन जावेगी दासी तू,
संपूर्ण है माने ज्ञान तेरा,
शिव अजर अमर अविनाशी तू।
भूतां के दर्शन होने जब,
देखे बारात मंडेरे ते,
मैं ब्याह करवाऊं तेरे ते,
ओ शिव लेहरी बस तेरे ते।
माता पार्वती जी ने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए अनगिनत जन्म लिए और कठोर तप किया था। शिव जी का योगी रूप, उनका वैराग्य, और भूत प्रेतों की संगति भी उन्हें स्वीकार है। शिवजी अपने सच्चे स्वरूप में अविनाशी, नीलकंठ, और संपूर्ण ज्ञान के स्वामी हैं। माता पार्वती प्रेम और भक्ति की मूर्ति बनकर कहती हैं कि वे शिव के बिना कुछ नहीं और अंत में वे विवाह के लिए दृढ़ संकल्प लेती हैं। शिव जी और पार्वती जी का दिव्य प्रेम हमारे मन में भक्ति और विश्वास को अधिक मजबूत बनाता है। जय शिव शक्ति।
Shiv Lehri (Official Video) Khasa Aala Chahar | Bhole Baba Song | New Haryanvi Songs Haryanavi 2025
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Song : Shiv Lehri (Official Video)
Singer/Lyrics/Composer : Khasa Aala Chaha
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Author - Saroj Jangir
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