इक पल में रीझ गए जब मेरे मुख भजन

इक पल में रीझ गए जब मेरे मुख से निकला श्री राधा नाम

राधा राधा राधा,
रिझाते रिझाते जीवन बीता,
रीझे ना तुम श्याम,
इक पल में रीझ गए,
जब मेरे मुख से निकला श्री राधा नाम।

मंदिर के दीप जलाए,
भोग चढ़ाए हजार,
मन के कपाट बंद थे,
कैसे आते गिरिधर द्वार,
भटके मन की सुध जब ली,
जागा प्रेम अनाम,
इक पल में रीझ गए मोहन,
जब मेरे मुख से निकला श्री राधा नाम।

मंत्र पढ़े यज्ञ किए,
व्रत रखे दिन रात,
फिर भी मन के सूनेपन में,
थी कोई बात,
संसार की हर साधना थी,
फिर भी रहा अधूरा काम,
इक पल में रीझ गए,
जब मेरे मुख से निकला श्री राधा नाम।

गोपियां सजी आरती लिए,
पर तेरा ध्यान अधूरा रहा,
सारी बंसी तेरी बजी,
पर प्रेम का राग तो राधा रहा,
मैंने भी जब मन समर्पित किया,
मिटा अहं का धाम,
इक पल में रीझ गए,
जब मेरे मुख से निकला श्री राधा नाम।

अब ना भोग ना आस कोई,
बस तेरी रट दिन रात,
राधा राधा जपते जपते,
खो बैठा सब बात,
श्याम ने हृदय में घर कर लिया,
अब मैं हुआ निष्काम,
इक पल में रीझ गए,
जब मेरे मुख से निकला श्री राधा नाम।

रिझाते रिझाते जीवन बीता,
रीझे ना तुम श्याम,
इक पल में रीझ गए मोहन,
जब मेरे मुख से निकला श्री राधा नाम,
राधा राधा राधा।

हमने जीवन भर श्याम को रिझाने के लिए अनेक साधनाएं की परंतु वे प्रसन्न नहीं हुए। जब हमने प्रेम पूर्वक राधा नाम का जप किया तो मोहन तुरंत रीझ गए। संसार की सारी तपस्याएं अधूरी रहीं पर राधा नाम लेने मात्र से हृदय में कृष्ण का वास हो गया। अहंकार मिटाकर जब हमने प्रेम से समर्पण किया, तब श्याम ने अपना लिया। अब न कोई इच्छा बची, बस राधा-राधा जपते हुए  हम पूर्ण आनंद में हैं। जय श्री राधे।


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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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