हे उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन
हे उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन
(अब आओ हे मोहन मुरार,
भक्तों का तुम उद्धार करो,
हे रमाकांत, शेषावतार,
दुखियों का बेड़ा पार करो।
हम सब संकट में जकड़े हैं,
मोहन! ना देर लगाओ तुम,
हे कृष्ण-कन्हैया ब्रजनंदन,
आकर के अब बचाओ तुम॥)
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन,
अब काटो सभी दुख-दर्द के बंधन।
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन,
हे उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन॥
दुनिया थी दंग देख तुम्हारे कमाल को,
तुमने तोड़ दिया दुश्मन के जाल को।
कालिया नाग को पलभर में पछाड़ा,
विष के दाँतों को तुमने उखाड़ा।
गुस्से में भर नाग जब फुफकारने लगा,
बालक समझ तुमको ललकारने लगा।
घनघोर युद्ध हुआ था उसके साथ में,
फन को पकड़ कुचल दिया हर बात में।
अब आओ प्रभु! लेके चक्र सुदर्शन,
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन॥
जब कंस की चालें कुछ काम ना आयीं,
तो मारने को पूतना राक्षसी आई।
गोपिका का वेश धर तुम्हें बहलाने लगी,
विषमय दूध पिला के मारने लगी।
फिर ले तुम्हें वो आकाश में उड़ चली,
विकराल हँसी हँस कर ऊपर बढ़ चली।
तुमने चूसा प्राण उस नीच के तन से,
गिर पड़ी वह राक्षसी आकुल गगन से।
एक पल में ही तुमने उसका अंत किया,
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन॥
जब ग्वाल-बालों ने पूजा आरंभ की,
इंद्रदेव को तब क्रोध प्रबल हो उठा।
तूफान, बिजली, जल की वर्षा भारी,
आकाश से गिरती बिजली थी नारी।
ब्रज डूबने लगा, मची चहुँओर हाहाकार,
सबने पुकारा “श्याम! करो उद्धार!”
तब तुमने उंगली पे गोवर्धन उठाया,
इंद्र का घमंड उसी क्षण मिटाया।
भक्तों की शान रख ली तुमने,
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन॥
तुम टेर सुन भक्तों की, मुकर नहीं सकते,
है कौन-सा दुख जो हर नहीं सकते?
अब आओ प्रभु, श्री श्याम हमारे,
निकालो हमें इस मझधार किनारे।
हर लो संकट, दुख और परेशानी,
दया करो अब, हे नंद के दुलारी।
अब काटो सभी नाथ दुख-दर्द के बंधन,
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन॥
भक्तों का तुम उद्धार करो,
हे रमाकांत, शेषावतार,
दुखियों का बेड़ा पार करो।
हम सब संकट में जकड़े हैं,
मोहन! ना देर लगाओ तुम,
हे कृष्ण-कन्हैया ब्रजनंदन,
आकर के अब बचाओ तुम॥)
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन,
अब काटो सभी दुख-दर्द के बंधन।
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन,
हे उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन॥
दुनिया थी दंग देख तुम्हारे कमाल को,
तुमने तोड़ दिया दुश्मन के जाल को।
कालिया नाग को पलभर में पछाड़ा,
विष के दाँतों को तुमने उखाड़ा।
गुस्से में भर नाग जब फुफकारने लगा,
बालक समझ तुमको ललकारने लगा।
घनघोर युद्ध हुआ था उसके साथ में,
फन को पकड़ कुचल दिया हर बात में।
अब आओ प्रभु! लेके चक्र सुदर्शन,
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन॥
जब कंस की चालें कुछ काम ना आयीं,
तो मारने को पूतना राक्षसी आई।
गोपिका का वेश धर तुम्हें बहलाने लगी,
विषमय दूध पिला के मारने लगी।
फिर ले तुम्हें वो आकाश में उड़ चली,
विकराल हँसी हँस कर ऊपर बढ़ चली।
तुमने चूसा प्राण उस नीच के तन से,
गिर पड़ी वह राक्षसी आकुल गगन से।
एक पल में ही तुमने उसका अंत किया,
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन॥
जब ग्वाल-बालों ने पूजा आरंभ की,
इंद्रदेव को तब क्रोध प्रबल हो उठा।
तूफान, बिजली, जल की वर्षा भारी,
आकाश से गिरती बिजली थी नारी।
ब्रज डूबने लगा, मची चहुँओर हाहाकार,
सबने पुकारा “श्याम! करो उद्धार!”
तब तुमने उंगली पे गोवर्धन उठाया,
इंद्र का घमंड उसी क्षण मिटाया।
भक्तों की शान रख ली तुमने,
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन॥
तुम टेर सुन भक्तों की, मुकर नहीं सकते,
है कौन-सा दुख जो हर नहीं सकते?
अब आओ प्रभु, श्री श्याम हमारे,
निकालो हमें इस मझधार किनारे।
हर लो संकट, दुख और परेशानी,
दया करो अब, हे नंद के दुलारी।
अब काटो सभी नाथ दुख-दर्द के बंधन,
उद्धार करो आके प्रभु देवकीनंदन॥
Uddhaar Karo Aake Prabhu [Full Song] Kanhiya Naam Hai Tera
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जब-जब संसार में संकट छाया है, तब-तब मोहन मुरारी ने अपने भक्तों का उद्धार किया है। चाहे कालिया नाग का आतंक हो, पूतना की कुटिलता या इंद्र का घमंड—हर बार कृष्ण ने अपने अद्भुत पराक्रम और करुणा से अपने भक्तों को बचाया। उनकी लीलाएँ यही सिखाती हैं कि जब भी सच्चा प्रेम और विश्वास लेकर पुकारा जाए, कृष्ण अवश्य आते हैं और हर दुःख-दर्द, हर बंधन को काट देते हैं।
आज भी जीवन के संघर्षों और दुखों में फंसे भक्त बस यही प्रार्थना करते हैं—हे देवकीनंदन, अब आओ और सबका उद्धार करो। तुम्हारी टेर सुनकर कोई भी संकट टिक नहीं सकता, तुम्हारी कृपा से हर विपत्ति पार हो जाती है। बस एक बार अपने चक्र-सुदर्शन के साथ आकर, अपने भक्तों के जीवन की नैया को भवसागर से पार लगा दो, यही सच्ची पुकार है।
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तू है थानेदार सांवरे करले गिरफ्तार
चाँदी का पालना लायो मारा सेठ जी भजन
बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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आज भी जीवन के संघर्षों और दुखों में फंसे भक्त बस यही प्रार्थना करते हैं—हे देवकीनंदन, अब आओ और सबका उद्धार करो। तुम्हारी टेर सुनकर कोई भी संकट टिक नहीं सकता, तुम्हारी कृपा से हर विपत्ति पार हो जाती है। बस एक बार अपने चक्र-सुदर्शन के साथ आकर, अपने भक्तों के जीवन की नैया को भवसागर से पार लगा दो, यही सच्ची पुकार है।
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Author - Saroj Jangir
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